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ईरान के नेता खामेनेई का अमेरिका पर कड़ा हमला, क्षेत्रीय स्थिरता को बताया खतरा

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए फारस की खाड़ी क्षेत्र को लेकर एक कड़ा बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका की नीतियों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया और अपने परमाणु तथा मिसाइल कार्यक्रमों को राष्ट्रीय संपत्ति मानते हुए किसी भी दबाव में इन्हें छोड़ने से इनकार किया। खामेनेई ने कहा कि इस क्षेत्र में विदेशी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं है। उनका यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयान के जवाब में आया है, जिससे दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की स्थिति को और हवा मिल सकती है।
 

खामेनेई का बयान

नई दिल्ली - ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए फारस की खाड़ी क्षेत्र के बारे में एक कड़ा बयान जारी किया। यह संदेश ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने अमेरिका की नीतियों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया।


ईरान का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम

खामेनेई ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को राष्ट्रीय संपत्ति मानता है और किसी भी दबाव में इन्हें छोड़ने का इरादा नहीं रखता। उन्होंने कहा कि भविष्य में फारस की खाड़ी क्षेत्र का विकास अमेरिका के बिना भी संभव है।


विदेशी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं

“विदेशी ताकतों के लिए यहां कोई जगह नहीं”
खामेनेई ने अपने बयान में कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास के देशों की किस्मत आपस में जुड़ी हुई है और बाहरी शक्तियों को यहां दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों किलोमीटर दूर से आने वाली ताकतों के लिए इस क्षेत्र में कोई स्थान नहीं है।


ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया

ट्रंप के बयान पर पलटवार
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ परमाणु समझौता होने तक हरमुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक मौजूद रहेंगे। खामेनेई ने इस नीति को अमेरिका की “शर्मनाक नाकामी” बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।


बढ़ता तनाव

बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है। खामेनेई का ताजा बयान एक बार फिर दोनों देशों के बीच टकराव को बढ़ावा दे सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ सकती है।