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ईरान के फैसले पर ट्रंप का बयान: कोई चिंता नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा शांति वार्ता रोकने के फैसले पर कोई चिंता न होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान ने वार्ता में बहुत समय बर्बाद किया है। ट्रंप ने इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को बेरूत पर हमले से रोकने का दावा किया है। इस बीच, फ्रांस ने लेबनान में स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है। जानें इस संकट पर और क्या हो रहा है।
 

शांति वार्ता पर ट्रंप का दृष्टिकोण


ईरान का निर्णय: शांति वार्ता जारी रखने का अधिकार


वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में तनाव उत्पन्न हो गया है। ईरान ने वार्ता को रोकने का निर्णय लिया है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस खबर से कोई चिंता नहीं है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने वार्ता में बहुत अधिक समय बर्बाद किया है और उनका मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।


ट्रंप का साक्षात्कार

एक फोन साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि वार्ता में विफलता से उनके दृष्टिकोण में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आएगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के साथ बातचीत समाप्त हो गई है, तो उन्होंने कहा, "मुझे परवाह नहीं है कि वे खत्म हो गई हैं या नहीं।"


उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेरूत पर बड़े सैन्य हमले से रोकने में मदद की। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू से इस हमले को टालने का अनुरोध किया और उन्होंने अपने सैनिकों को वापस बुला लिया।


फ्रांस की प्रतिक्रिया

फ्रांस ने लेबनान में स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है। फ्रांसीसी राजदूत ने कहा कि आत्मरक्षा का अधिकार सीमित होता है और इस्राइल द्वारा लेबनान की संप्रभुता पर हमले को गलत बताया। उन्होंने इस्राइल से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और अपनी सेना को वापस बुलाने का आग्रह किया।


यह तनाव तब बढ़ा जब इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के ऐतिहासिक 'बॉफोर्ट कैसल' पर नियंत्रण कर लिया। मध्य-अप्रैल में हुए संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। फ्रांस अब एक नया प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य इस्राइली सेना की वापसी और सीमा पर शांति स्थापित करना है।