×

ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। अमेरिका और इजरायल पर हमलों के जवाब में यह कदम उठाया गया है, जिससे कई देशों में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो रही है। जानें इस स्थिति के संभावित समाधान और इसके दूरगामी परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

वैश्विक सप्लाई चेन पर संकट


विश्व सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव


ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर हो रहे हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है। पिछले एक महीने से अधिक समय से यह जलडमरूमध्य बंद होने के कारण कई देशों में आवश्यक वस्तुओं, तेल और गैस की कमी हो रही है।


भारत सहित एशिया के अधिकांश देशों में भी तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग कब तक बंद रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज को फिर से खोलने के लिए कुछ संभावित विकल्प हैं।


पहला विकल्प: ईरान का झुकना

पहला विकल्प यह है कि ईरान ट्रंप की मांगों के आगे झुक जाए और युद्धविराम हो जाए। हालांकि, इसके बाद ईरान विदेशी जहाजों से भारी टोल वसूलना शुरू कर सकता है। हाल ही में कुछ जहाजों पर ऐसे टोल लगाए जाने की खबरें आई हैं। शांति काल में टोल लगाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो खाड़ी क्षेत्र से होने वाले सभी निर्यातों की कीमतें बढ़ना तय है।


दूसरा विकल्प: अमेरिका की जमीनी कार्रवाई

दूसरा विकल्प यह है कि अमेरिका हवाई और मिसाइल हमलों से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई शुरू कर सकता है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के लगभग 50,000 सैनिक मौजूद हैं। रास्ता खोलने के लिए अमेरिका को अपने नौसैनिक बेड़े को उतारना होगा ताकि वह समुद्र में माइन्स को हटा सके और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा कर सके। हालांकि, सहयोगी देशों का समर्थन न मिलने के कारण ट्रंप के लिए यह सैन्य और राजनीतिक जोखिम उठाना फिलहाल मुश्किल लग रहा है।


तीसरा विकल्प: संयुक्त राष्ट्र की पहल

तीसरा विकल्प यह है कि अमेरिका युद्ध समाप्त कर दे और अपनी सेना हटा ले, लेकिन सुरक्षित मार्ग का मसला अनसुलझा रहे। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र एक नया प्रस्ताव लाकर सदस्य देशों को सामूहिक नौसैनिक कार्रवाई की अनुमति दे सकता है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश, अमेरिकी सेना की वापसी के बाद यूएन के नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी उठा सकते हैं।


अधिक जानकारी के लिए

ये भी पढ़ें: भारत की जीडीपी वृद्धि 6.2 फीसदी रहने का अनुमान: रिपोर्ट