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ईरान ने पाकिस्तान में सीजफायर डील में भाग लेने से किया इनकार

ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित सीजफायर डील में शामिल होने से मना कर दिया है, यह कहते हुए कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, तब तक वह बातचीत नहीं करेगा। अमेरिका और ईरान के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने वाली है, जिसमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम शामिल हैं। जानें ईरान की सीजफायर की मांग के पीछे के कारण और इसके क्षेत्रीय प्रभाव।
 

ईरान का सीजफायर डील में शामिल न होने का निर्णय

नई दिल्ली। ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित सीजफायर समझौते में शामिल होने से मना कर दिया है। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, तब तक वह किसी भी बातचीत में भाग नहीं लेगा।

इससे पहले, एक अमेरिकी वेबसाइट ने बताया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल, जिसमें संसद के अध्यक्ष गालिबाफ और विदेश मंत्री अराघची शामिल हैं, गुरुवार शाम पाकिस्तान पहुंचा है। हालांकि, फार्स ने इस खबर को गलत बताया।

7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 2 सप्ताह के सीजफायर पर सहमति बनी थी। यह भी तय हुआ था कि दोनों देशों के नेता पाकिस्तान में मिलेंगे। यह वार्ता शनिवार को इस्लामाबाद में आयोजित की जाएगी, जिसके लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल आज वहां पहुंच रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच चर्चा के मुद्दे

ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका का कहना है कि ईरान को कोई संवर्धन नहीं करना चाहिए। ईरान को अपने सभी उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम को बाहर भेजना होगा और अपने न्यूक्लियर सुविधाओं को बंद या सीमित करना होगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: यह मार्ग विश्व के अधिकांश तेल और गैस के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान अभी भी इस पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और शुल्क लेने की बात कर रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग पूरी तरह से खुला और सुरक्षित हो।

बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम: अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है।

सैंक्शंस हटाना: ईरान चाहता है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तुरंत हटा दिए जाएं, साथ ही फ्रोजन एसेट्स भी वापस मिलें और मुआवजा दिया जाए।

ईरान की लेबनान में सीजफायर की मांग का कारण:

हिजबुल्लाह, जो लेबनान में ईरान समर्थित सबसे शक्तिशाली मिलिशिया है, के कमजोर होने पर ईरान का क्षेत्रीय नेटवर्क प्रभावित हो सकता है। यदि लेबनान में इजराइल के हमले जारी रहते हैं, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

ईरान ने सीजफायर के लिए 10 शर्तें रखी हैं, जिनमें क्षेत्रीय युद्धों को समाप्त करना शामिल है, जैसे कि ईरान, लेबनान और यमन पर हमले रोकना।