ईरान ने भारत और चीन के जहाजों को होर्मुज जल मार्ग से दी छूट
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में ट्रंप को झटका
नई दिल्ली। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी संसद पर फिर से नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। इस बीच, ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जल मार्ग से गुजरने की पाबंदियों से मुक्त कर दिया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष, अमीर हयात-मोघद्दम ने कहा कि इन चार देशों के जहाज अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से बिना किसी रोक-टोक के गुजर सकते हैं।
ईरान का नया कदम
हयात-मोघद्दम ने एक इंटरव्यू में बताया कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाज अब बिना किसी पाबंदी के होर्मुज जल मार्ग से गुजर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस छूट का उद्देश्य इन देशों के साथ ईरान के संबंधों को मजबूत करना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत से दवाओं का आयात करने के लिए भारतीय जहाजों को आने-जाने की अनुमति दी गई है, जबकि चीन के जहाजों को राजनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए छूट दी गई है।
ट्रांजिट शुल्क की जानकारी
हयात-मोघद्दम ने कहा कि ईरान भारतीय और चीनी जहाजों से ट्रांजिट शुल्क लेता है, जबकि कतर के जहाजों को बिना शुल्क के गुजरने की अनुमति है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इराक के जहाजों को शुल्क देना पड़ता है या नहीं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90% आयात करता है, जिसमें से करीब 30% हिस्सा होर्मुज जल मार्ग से आता है। पहले यह आंकड़ा 70% था, लेकिन अब भारत ने अपने आयात के स्रोतों में विविधता ला ली है।
LPG और खाद का आयात
हालांकि, भारत का 90% LPG आयात अभी भी होर्मुज जल मार्ग से होता है। कतर और UAE से होने वाले LNG आयात का 50% से अधिक हिस्सा भी इसी मार्ग से आता है। यह जलमार्ग भारत के लिए उर्वरक के आयात के लिए भी महत्वपूर्ण है। ईरान द्वारा जलमार्ग को बंद करने के बाद, भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में ऊर्जा आपूर्ति की निर्बाध आवाजाही की मांग की है।
संघर्ष में भारतीयों की मौत
हयात-मोघद्दम की टिप्पणी होर्मुज जल मार्ग में जहाजों की आवाजाही पर जारी प्रतिबंधों के संदर्भ में आई है। यूरोपीय संघ का कहना है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत जहाजों को अपनी पहचान बतानी होगी। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, फरवरी से अगस्त तक व्यापारिक जहाजों पर कम से कम 70 हमले हुए, जिनमें 19 नाविकों की मौत हुई। इस संघर्ष में अब तक 24 भारतीयों की जान गई है।