ईरान ने युद्धविराम प्रस्ताव को किया अस्वीकार, अमेरिका के साथ बातचीत में बाधा
युद्धविराम प्रस्ताव का विवरण
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच एक मसौदा प्रस्ताव में 45 दिनों के युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का उल्लेख किया गया है, जिसका उद्देश्य युद्ध समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करना है। यह जानकारी पश्चिम एशिया के दो अधिकारियों ने साझा की है। उनके अनुसार, यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के मध्यस्थों द्वारा तैयार किया गया है, जो संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास में लगे हुए हैं। उनका मानना है कि यह 45 दिन की अवधि दोनों देशों के बीच व्यापक वार्ता के लिए पर्याप्त होगी, जिससे स्थायी युद्धविराम पर सहमति बन सके।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव रविवार की रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया था, लेकिन अमेरिका की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज को खोलने और 45 दिन के अस्थायी युद्धविराम के लिए भी इनकार कर दिया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें लगता है कि अमेरिका स्थायी युद्धविराम नहीं चाहता।
युद्धविराम की शर्तें
जानें क्या हैं युद्धविराम की शर्तें?
प्रस्ताव के पहले चरण में लगभग 45 दिनों का युद्धविराम लागू करने का सुझाव दिया गया है, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत की जाएगी। यदि बातचीत के लिए और समय की आवश्यकता होती है, तो इस युद्धविराम को बढ़ाया भी जा सकता है। दूसरे चरण में युद्ध समाप्त करने के लिए अंतिम समझौता किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलना और ईरान के समृद्ध यूरेनियम का समाधान, जैसे कि उसे देश से बाहर भेजना या उसकी मात्रा को कम करना, केवल अंतिम समझौते के बाद ही संभव होगा। इस प्रस्ताव की शर्तों की जानकारी सबसे पहले एक समाचार वेबसाइट ने दी थी। ईरान का कहना है कि वह तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक उसे वित्तीय क्षतिपूर्ति और भविष्य में हमले न होने का आश्वासन नहीं मिल जाता।
समझौता आसान नहीं
समझौता इतना भी नहीं है आसान
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी भी प्रकार के समझौते की संभावना नहीं बन पाई है। इसका मुख्य कारण यह है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन अब वे फिर से काफी आक्रामक हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है। ईरान भी लगातार कह रहा है कि वह अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है।