ईरान पर अमेरिका के हवाई हमले, क्षेत्र में तनाव बढ़ा
अमेरिका का हवाई हमला
दुबई से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने मंगलवार की सुबह ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी को फिर से लागू करने की घोषणा के कुछ घंटे बाद हुई।
इसके जवाब में, ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इस स्थिति ने हालिया युद्धविराम समझौते को संकट में डाल दिया है और क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की संभावना को बढ़ा दिया है।
इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। अंतरिम समझौते का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस लक्ष्य को अधूरा छोड़ दिया है।
अमेरिकी सेना की मध्य कमान ने बताया कि हमलों में ईरान की तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों, ड्रोन ठिकानों और समुद्री सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया। ईरान ने हमलों की पुष्टि की है, लेकिन नुकसान या हताहतों की जानकारी नहीं दी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इन हमलों को 'एक और बड़ा हमला' करार दिया और कहा कि अमेरिका ईरान की नाकेबंदी को फिर से लागू कर रहा है। इसके तुरंत बाद, ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और होर्मुज से गुजरने वाले तीन तेल टैंकरों पर हमला किया।
संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े 'मोम्बासा' और 'अल बहिया' टैंकरों में आग लग गई। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एक नाविक की मौत हुई है और आठ अन्य घायल हुए हैं। यूएई ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने दोनों टैंकरों पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि जहाजों ने उनकी चेतावनियों की अनदेखी की थी।
डच नौवहन कंपनी 'स्टोल्ट टैंकर्स' ने बताया कि उसका जहाज 'स्टोल्ट मैग्नीशियम' भी ओमान तट के पास हमले का शिकार हुआ। जहाज के इंजन कक्ष में आग लगी, लेकिन सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं।
मंगलवार की सुबह बहरीन में तीन बार मिसाइल हमले की चेतावनी वाले सायरन बजाए गए। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।