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ईरान में धमाकों से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव, केश्म द्वीप का सामरिक महत्व

ईरान के केश्म द्वीप पर हाल ही में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव को बढ़ा दिया है। इन धमाकों के पीछे अमेरिका का हाथ होने का दावा किया जा रहा है, जबकि ईरानी मीडिया ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। केश्म द्वीप का सामरिक महत्व और यहां की भूमिगत सैन्य तैयारियों के बारे में जानें। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ बातचीत के जरिए समझौते की संभावना जताई है। इस स्थिति का वैश्विक तेल बाजार पर भी असर पड़ सकता है।
 

ईरान में सिलसिलेवार धमाके

नई दिल्ली - अमेरिका में मिडटर्म चुनावों से पहले ईरान में हुए धमाकों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल मचा दी है। सोमवार को ईरान के केश्म द्वीप पर कम से कम पांच शक्तिशाली विस्फोट हुए। इसके साथ ही बंदर लेंगेह शहर में भी धमाकों की सूचना मिली है। एक अमेरिकी समाचार पत्र ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इन हमलों के पीछे अमेरिका का हाथ हो सकता है, हालांकि ईरानी मीडिया ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।


ईरानी मीडिया के अनुसार, देश ने अमेरिका के दो MQM-170 जासूसी ड्रोन को मार गिराने का दावा भी किया है। इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


केश्म द्वीप का सामरिक महत्व

केश्म द्वीप, जो लगभग 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला है, ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है। पहले यह पर्यटन और मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां ईरान ने अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर लिया है। यह द्वीप होर्मुज स्ट्रेट के निकट स्थित है, जिससे इसका सामरिक महत्व और बढ़ जाता है।


भूमिगत सैन्य ठिकाने

रिपोर्टों के अनुसार, केश्म द्वीप के नीचे सुरंगों और नमक की गुफाओं का एक बड़ा नेटवर्क है। माना जाता है कि ईरान ने इन ठिकानों में तटीय मिसाइल सिस्टम और तेज गति से हमला करने वाली नौकाएं तैनात की हैं, जिससे वह समुद्री क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बनाए रखता है।


होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण

केश्म द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने की क्षमता प्रदान करती है। ईरान इस समुद्री मार्ग को बाधित करने या जहाजों की आवाजाही को सीमित करने की क्षमता रखता है। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है, और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।


ट्रम्प का ईरान के साथ समझौते का संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर दोबारा हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने बातचीत के जरिए समझौता संभव होने की उम्मीद जताई। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है, तो ट्रम्प ने इससे इनकार किया।


ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ बड़े युद्ध की आशंका कम होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है। उनके अनुसार, 31 अक्टूबर को तेल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 1 नवंबर को घटकर 108 डॉलर प्रति बैरल हो गई।


भविष्य की स्थिति

फिलहाल केश्म द्वीप पर हुए धमाकों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि इन घटनाओं के पीछे किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो इसका असर अमेरिका-ईरान संबंधों के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर भी पड़ सकता है।