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ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन: आर्थिक संकट के बीच हालात बिगड़ते जा रहे हैं

ईरान में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जहां सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बढ़ते जा रहे हैं। आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोज़गारी के कारण आम नागरिकों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। जानें इस संकट की जड़ें और प्रदर्शनकारियों की स्थिति के बारे में।
 

ईरान में विरोध प्रदर्शनों का उभार

तेहरान: ईरान में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ईरान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिसका प्रभाव आम जनता की ज़िंदगी पर पड़ रहा है। महंगाई, मुद्रा का अवमूल्यन और बेरोज़गारी के कारण लोगों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिल रहा है।


प्रदर्शनों का विस्तार

28 दिसंबर से शुरू हुए ये प्रदर्शन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गए हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, ईरान के कई शहरों में दुकानें बंद हैं और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर इकट्ठा होकर नारेबाज़ी कर रहे हैं। कई स्थानों पर आगज़नी की घटनाएं भी सामने आई हैं। अब तक कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों को हिरासत में लिया गया है।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ट्रंप का बयान: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को और अधिक अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का सहारा लेती है, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका पूरी तरह सतर्क है और आवश्यक कार्रवाई के लिए तैयार है।


युवाओं का उत्साह

ट्रंप के इस बयान पर ईरान के कई राजनीतिक नेता नाराज़गी जता रहे हैं, जबकि युवा वर्ग, विशेषकर जेन-ज़ी के बीच इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा बलों की हिंसा को छुपाने की कोशिश कर रही है।


विरोध प्रदर्शनों की तीव्रता

शुक्रवार रात भी तेहरान के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। नाजियाबाद, सत्तारखान, नर्मक और तेहरानपार्स जैसे क्षेत्रों में लोग देर रात तक सड़कों पर उतरे रहे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्लामिक रिपब्लिक का झंडा उतारे जाने की भी खबरें आई हैं।


आर्थिक संकट की जड़ें

इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह आर्थिक बदहाली मानी जा रही है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जहां एक डॉलर की कीमत 14.2 लाख रियाल तक पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में महंगाई दर 42.2 प्रतिशत रही। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में एक साल में 72 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जबकि दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च भी लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गया है। इन हालातों ने आम ईरानी नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।