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ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तनाव में वृद्धि

ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों में स्थिति गंभीर होती जा रही है। लगभग दो सप्ताह से जारी इन प्रदर्शनों में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है और 10,670 लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि हमला हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे। जानें इस संकट की पूरी कहानी और अमेरिका की संभावित प्रतिक्रिया के बारे में।
 

ईरान में प्रदर्शनों में बढ़ती हिंसा


प्रदर्शनों में अब तक 538 लोगों की मौत, अमेरिका की संभावित कार्रवाई की चर्चा


तेहरान : ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ये प्रदर्शन लगभग दो सप्ताह पहले शुरू हुए थे और अब पूरे देश में फैल चुके हैं, जिससे ईरान की राजनीतिक स्थिति अत्यंत अस्थिर हो गई है।


इन प्रदर्शनों के कारण देशभर में तनाव का माहौल है, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो रही हैं। ईरान में प्रकाशित समाचारों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और दमन के कारण अब तक 538 लोगों की जान जा चुकी है। इंटरनेट और फोन सेवाओं के बंद होने से स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन हो गया है।


हिरासत में लिए गए लोग

रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 10,670 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, मृतकों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जिसमें 450 से अधिक प्रदर्शनकारी और 41 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। ईरान सरकार ने हताहतों की संख्या का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है।


ईरानी संसद अध्यक्ष की चेतावनी

इस बीच, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो अमेरिकी और इस्राइली सैनिकों को भी निशाना बनाया जाएगा। यह चेतावनी तब आई है जब तेहरान और अन्य बड़े शहरों में प्रदर्शन दो हफ्तों से जारी हैं।


संसद में यह बयान उस समय आया जब सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के पास पहुंचे और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाए। विदेश में रहने वाले लोगों को चिंता है कि सूचना पर पाबंदी के कारण सुरक्षा बलों का सख्त रुख बढ़ सकता है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया है और कहा है कि अमेरिका मदद के लिए तैयार है।