ईरान में सत्ता संघर्ष: आईआरजीसी और राष्ट्रपति के बीच टकराव
ईरान में जंग का प्रभाव
नई दिल्ली। ईरान में पिछले 33 दिनों से चल रही लड़ाई अब अपने प्रभाव दिखाने लगी है। सरकार के भीतर मतभेद उभरने लगे हैं, और यह जानकारी सामने आई है कि ईरान की धार्मिक सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी), और सरकार के बीच टकराव बढ़ रहा है। कहा जा रहा है कि आईआरजीसी ने देश के शासन पर पूरी तरह से नियंत्रण स्थापित कर लिया है।
सत्ता संघर्ष की रिपोर्ट
ईरान के समाचार पत्र ‘तेहरान टाइम्स’ ने एक रिपोर्ट में बताया है कि आईआरजीसी और राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान के बीच सत्ता को लेकर खींचतान चल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आईआरजीसी ने अब देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति पजेशकियान की सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई से मुलाकात नहीं हो पा रही है। इस विवाद की शुरुआत अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने ईरान में नेताओं के एक समूह के बातचीत होने का दावा किया था।
ट्रंप का दावा और ईरान की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने पिछले तीन दिनों से यह कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी टीम कुछ ‘समझदार’ ईरानी नेताओं के संपर्क में है और बातचीत के माध्यम से स्थिति को शांत करने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का नया नेतृत्व पिछले नेतृत्व की तुलना में कम कट्टरपंथी और अधिक समझदार है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया।
पजेशकियान की सीमित शक्तियाँ
हालांकि, ईरानी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति पजेशकियान कोई महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पजेशकियान ने 26 मार्च को नए खुफिया मंत्री की नियुक्ति की कोशिश की थी। वे हुसैन देहगान को नियुक्त करना चाहते थे, लेकिन आईआरजीसी के प्रमुख अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया। यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले कमांडर मोहम्मद पाकपुर के मारे जाने के बाद वहीदी ने पद संभाला है। वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति आईआरजीसी ही करेगा और वही उन्हें संभालेगा।