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ईरान युद्ध से प्रभावित एशिया की अर्थव्यवस्था: भारत और चीन पर असर

ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट ने एशिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत और चीन की आर्थिक वृद्धि में कमी आने की संभावना है। जानें इस संकट का विस्तृत विश्लेषण और इसके संभावित परिणाम।
 

ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट

ईरान युद्ध: ईरान के संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया है। कई देशों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इस स्थिति में, संयुक्त राष्ट्र ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों में आर्थिक विकास में कमी का अनुमान लगाया है, जिसमें भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं।

एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग के एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने बताया कि चीन की अर्थव्यवस्था में 2025 में 5% की वृद्धि होने की उम्मीद थी, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इस वर्ष यह 4.6% से घटकर 4.3% तक पहुंचने की संभावना है।

हमजा मलिक ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले वर्ष 7% से अधिक की वृद्धि हुई थी, लेकिन युद्ध के कारण तेल, पेट्रोल और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के चलते इस वर्ष इसमें लगभग 1% की कमी आने की संभावना है, जिससे यह लगभग 6% तक पहुंच सकती है।

मलिक ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “एशिया-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसलिए, इस क्षेत्र में होने वाली घटनाओं का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है।”