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ईरान संकट: भारत में पेट्रोल-डीजल और सोने-चांदी की कीमतों में संभावित वृद्धि

ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और सोने-चांदी की कीमतों में संभावित वृद्धि की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है। जानें इस संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

नई दिल्ली में, अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के चलते पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। यदि यह संघर्ष लंबा चलता है और रणनीतिक तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो इसका सीधा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।


पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित उछाल

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85-90% आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर आपूर्ति बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।


इस स्थिति में, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 95 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 105 रुपये तक और डीजल 88 रुपये से बढ़कर 96 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय कई कारकों पर निर्भर करेगा।


सरकारी नीतियों का प्रभाव

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 15 दिनों के औसत कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर तय किए जाते हैं। लेकिन उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली अंतिम कीमत में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। इसलिए, कंपनियां सैद्धांतिक रूप से कीमतें बढ़ा सकती हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से सरकार की नीति महत्वपूर्ण होती है। युद्ध जैसे हालात में, सरकार महंगाई नियंत्रित रखने के लिए टैक्स में कटौती या कंपनियों को कीमत स्थिर रखने की सलाह दे सकती है।


सोना-चांदी में तेजी की संभावना

युद्ध और अनिश्चितता के माहौल में, निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी बाजार के जानकारों का अनुमान है कि सोने की कीमत 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपये तक जा सकती है। वहीं, चांदी, जो वर्तमान में लगभग 2.67 लाख रुपये प्रति किलो है, 3.50 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।


भारत के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ

ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण, भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की रुकावट से न केवल पेट्रोल-डीजल, बल्कि परिवहन, महंगाई दर, शेयर बाजार और आम उपभोक्ता की जेब पर व्यापक असर पड़ सकता है। वर्तमान में, सरकार हालात पर नजर रखे हुए है और वैश्विक बाजार के रुख के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।