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ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी में डबल सेंचुरी बनाकर रचा नया इतिहास

भारतीय क्रिकेट के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए डबल सेंचुरी बनाई। उन्होंने ईस्ट जोन की कप्तानी करते हुए टीम को 600 रन के पार पहुंचाया और इस ऐतिहासिक पारी के साथ रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया। जानें कैसे उन्होंने इस मैच में अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और साउथ जोन के कप्तान से बदला लिया।
 

नई दिल्ली में ईशान किशन की ऐतिहासिक पारी


भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की कप्तानी करते हुए फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण मुकाबले में डबल सेंचुरी बनाकर इतिहास रच दिया। चेन्नई में साउथ जोन के खिलाफ खेलते हुए, उन्होंने टीम को 600 रन के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 250 रन बनाकर जब वह रिटायर हुए, तब टीम का स्कोर 5 विकेट पर 611 रन था।


ईशान किशन की अद्वितीय पारी

ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में एक ऐसा कारनामा किया है जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ईस्ट जोन ने पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। वैभव सूर्यवंशी ने 44 रन बनाकर आउट हुए, जबकि अभिमन्यू ईश्वरन ने 72 रन की पारी खेली। हालांकि, 147 रन पर टीम ने तीन विकेट खो दिए थे। ऐसे में ईशान ने मैदान पर कदम रखा और पहले शतक को डबल सेंचुरी में बदल दिया।


साउथ जोन के कप्तान से बदला

साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने मैच के दौरान ईस्ट जोन के युवा ओपनर वैभव सूर्यवंशी को स्लेज किया था। ईशान किशन ने अपने साथी के साथ हुई इस घटना का बदला लेते हुए मैदान पर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पहले दिन 122 गेंदों पर 13 चौके और 1 छक्के की मदद से शतक बनाया। दूसरे दिन, ईशान ने 204 गेंदों में 150 रन पूरे किए और फिर 270 गेंदों पर डबल सेंचुरी पूरी की।


ईशान किशन का नाम रिकॉर्ड बुक में

ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी में दोहरा शतक बनाकर एक और उपलब्धि हासिल की। वह इस टूर्नामेंट के फाइनल में 200 या उससे अधिक रन बनाने वाले केवल 7वें बल्लेबाज बन गए हैं। उनके नाम अब अंशुमान गायकवाड़, मंसूर अली खान पटौदी, रमन लांबा, चेतेश्वर पुजारा, यूसुफ पठान और यशस्वी जायसवाल के साथ जुड़ गया है।


ईस्ट जोन के लिए नया इतिहास

ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में दोहरा शतक बनाकर ईस्ट जोन के लिए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। वह इस फाइनल में दोहरा शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज हैं। इसके साथ ही, उन्होंने ईस्ट जोन के लिए फाइनल में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर भी बनाया, जो पहले ऋद्धिमान साहा के नाम था।