उत्तर कोरिया की उपभोक्तावाद की नई रणनीति: आधुनिकता का मुखौटा
उत्तर कोरिया ने हाल ही में एक नई उपभोक्तावाद रणनीति अपनाई है, जिसमें विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आधुनिक सुविधाएँ और ब्रांडेड उत्पाद पेश किए जा रहे हैं। हालांकि, यह प्रयास केवल अभिजात वर्ग के लिए है, जबकि आम नागरिकों की औसत आय बहुत कम है। इस लेख में हम इस रणनीति के पीछे के उद्देश्य और इसके संभावित दीर्घकालिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे। क्या यह नकली आधुनिकता वास्तव में टिकाऊ है? जानने के लिए पढ़ें।
Aug 29, 2025, 12:55 IST
उत्तर कोरिया की उपभोक्तावाद की नई छवि
उत्तर कोरिया को विश्व के सबसे अधिक सत्तावादी देशों में से एक माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, आर्थिक चुनौतियों और सूचना पर कड़े नियंत्रण के बावजूद, किम जोंग उन की सरकार अब देश की एक आधुनिक उपभोक्तावादी छवि प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विदेशी पर्यटकों और छात्रों द्वारा प्योंगयांग और तटीय क्षेत्रों के अनुभवों का वर्णन किया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्योंगयांग में ‘स्टारबक्स रिजर्व’ की हूबहू नकल ‘मिराई रिजर्व’ नामक कैफे में की जा रही है, जहाँ महंगी कॉफी कई डॉलर में बिकती है। इसी तरह, शहर का एक बहुमंजिला शॉपिंग मॉल ‘नॉर्थ कोरियन आइकिया’ के नाम से जाना जाता है, जो स्वीडिश कंपनी आइकिया के सामान और डिज़ाइन से मेल खाता है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के तहत उत्तर कोरिया में विदेशी लक्ज़री ब्रांडों का व्यापार निषिद्ध है, फिर भी यहाँ पश्चिमी ब्रांडों की नकल या तस्करी से लाए गए सामान की भरपूर मौजूदगी है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि किम जोंग उन की रणनीति केवल उपभोक्तावाद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि राजधानी के अभिजात वर्ग की पश्चिमी वस्तुओं की मांग को भुनाकर विदेशी मुद्रा जुटाना भी है।
अधिक जानकारी: हमारा देश दक्षिण कोरिया को कभी कूटनीतिक साझेदार के रूप में नहीं देखेगा: किम जोंग उन की बहन
दूसरा महत्वपूर्ण प्रयोग तटीय क्षेत्र वोनसान काल्मा रिसॉर्ट में किया गया है, जिसे ‘नॉर्थ कोरिया का वाइकिकी’ कहा जा रहा है। यहाँ विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आधुनिक होटल, वॉटर स्लाइड और विदेशी बीयर जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। रूस से आए पर्यटक इसे आकर्षक और चमचमाता बताते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि पर्यटन उद्योग पर संयुक्त राष्ट्र का कोई प्रतिबंध नहीं है, इसलिए उत्तर कोरिया इसे विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक प्रमुख साधन मानता है। हालाँकि, इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं, जैसे-जैसे विदेशी पर्यटक देश में आते हैं, बाहरी सूचनाएँ और विचार भी प्रवेश कर सकते हैं। इससे किम की सत्तावादी पकड़ कमजोर होने का खतरा है।
यहाँ एक बड़ा विरोधाभास यह है कि जहाँ प्योंगयांग में डिजिटल भुगतान, नकली ब्रांड और भव्य मॉल हैं, वहीं देश के आम नागरिकों की औसत वार्षिक आय केवल 1,000 डॉलर के आसपास है। अधिकांश लोग इन सुख-सुविधाओं से दूर हैं। यह स्पष्ट है कि किम की ‘आधुनिक उपभोक्ता संस्कृति’ वास्तव में एलीट वर्ग और विदेशी पर्यटकों के लिए सजाया गया मुखौटा है, न कि व्यापक समाज के लिए वास्तविक विकास।
इस प्रकार, उत्तर कोरिया की यह रणनीति दो स्तरों पर काम करती दिखती है। पहली, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर विदेशी मुद्रा जुटाना और दूसरी, देश की वैश्विक छवि को आधुनिक और पर्यटक-मित्र बनाना। लेकिन यह ‘नकली आधुनिकता’ कितनी टिकाऊ होगी, यह एक बड़ा प्रश्न है। पश्चिम की नकल और दिखावटी समृद्धि से तात्कालिक लाभ मिल सकता है, लेकिन यदि सूचना का प्रवाह और बाहरी संस्कृति का प्रभाव बढ़ता है, तो यह किम शासन के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकता है।
-नीरज कुमार दुबे