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उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का नया बदलाव: बारिश और तेज हवाओं की संभावना

उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम में बदलाव की तैयारी है, जहां रविवार से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके चलते हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और अन्य राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ओलावृष्टि और बिजली गिरने की आशंका है, जबकि मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। दक्षिण भारत में प्री-मानसून गतिविधियां भी तेज हो गई हैं, जिससे मानसून के समय पर आगमन की उम्मीद है।
 

मौसम में बदलाव की तैयारी


नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम एक बार फिर से बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार से पहाड़ी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसका प्रभाव हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में देखने को मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप अगले कुछ दिनों में कई स्थानों पर बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की संभावना है।


मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पश्चिमी विक्षोभ रविवार रात से पहाड़ी क्षेत्रों में प्रवेश करेगा और धीरे-धीरे इसका प्रभाव मैदानी इलाकों तक पहुंचेगा। सोमवार से अगले तीन से चार दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। पहाड़ी राज्यों में तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है, जबकि मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।


दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन मौसम विभाग का मानना है कि गर्मी इतनी नहीं बढ़ेगी कि हीटवेव जैसी स्थिति उत्पन्न हो। हालांकि, राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश में गर्मी का प्रभाव अधिक रहेगा और अगले कुछ दिनों तक लू चलने की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने राजस्थान और गुजरात के लिए अगले छह दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है, जबकि 12 और 13 मई को पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी गर्म हवाएं परेशान कर सकती हैं।


पूर्वी भारत में मौसम की स्थिति

पूर्वी भारत में भी मौसम पूरी तरह से शांत नहीं रहेगा। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और कई स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों, विशेषकर गोरखपुर और देवरिया में भी बादल और बूंदाबांदी के आसार हैं।


दक्षिण भारत में प्री-मानसून गतिविधियां

दक्षिण भारत में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही नमी के कारण केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में मौसम सक्रिय बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून समय पर केरल पहुंच सकता है। अंडमान-निकोबार में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि 22 मई मानी जाती है, जिसके बाद इसके धीरे-धीरे दक्षिण भारत की ओर बढ़ने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव बनने के संकेत भी मानसून को मजबूती दे सकते हैं।