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उत्तर प्रदेश और बिहार में ओलावृष्टि की बढ़ती घटनाएं: जानें कारण और सुरक्षा उपाय

इस वर्ष उत्तर प्रदेश और बिहार में ओलावृष्टि की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। जानें ओले कैसे बनते हैं, इसके पीछे के कारण और सुरक्षा उपाय। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ इसके मुख्य कारण हैं। इस लेख में हम ओलावृष्टि की प्रक्रिया और इससे बचने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
 

ओलावृष्टि की घटनाएं


नई दिल्ली: इस वर्ष उत्तर प्रदेश और बिहार में ओलावृष्टि की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। मार्च, अप्रैल और मई 2026 के दौरान कई जिलों में तेज तूफान और बारिश के साथ बड़े ओले गिरे हैं। इससे किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, खासकर आम और लीची के बागों को गंभीर नुकसान हुआ है।


इन घटनाओं के कारण कई स्थानों पर जनहानि भी हुई है। आमतौर पर ओलावृष्टि गर्मियों की शुरुआत से पहले होती है, लेकिन इस बार यह असामान्य रूप से अधिक रही है।


ओले कैसे बनते हैं?

ओले बनने की प्रक्रिया बादलों के भीतर होती है, विशेषकर उन ऊंचे और शक्तिशाली बादलों में जिन्हें 'क्यूम्युलोनिम्बस' कहा जाता है। जब तापमान बढ़ता है, तो जमीन का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है और ठंडी हवा के संपर्क में आकर पानी की बूंदों में बदल जाता है।


इन बादलों की एक विशेषता होती है कि इनमें तेज हवा के झोंके होते हैं, जो पानी की बूंदों को बहुत ऊंचाई तक ले जाते हैं, जहां तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर जाता है। इस ऊंचाई पर, ये बूंदें जमकर बर्फ के छोटे कणों में बदल जाती हैं।


ओलों का आकार कैसे बढ़ता है?

जब ये बर्फ के कण नीचे गिरने लगते हैं, तो हवा के तेज झोंके उन्हें फिर से ऊपर की ओर धकेल देते हैं। ऊपर जाते समय, वे 'सुपरकूल्ड' पानी की बूंदों से टकराते हैं, जिससे उनकी सतह पर बर्फ की एक नई परत जम जाती है। यह प्रक्रिया बार-बार होती है, जिससे ओले का आकार बढ़ता है। अंततः, जब ओला इतना भारी हो जाता है कि हवा उसे और ऊपर नहीं रोक पाती, तो वह जमीन पर गिर जाता है।


छोटे ओले अक्सर जमीन तक पहुंचने से पहले ही पिघल जाते हैं, जबकि बड़े ओले तेजी से गिरते हैं। इस बार उत्तर प्रदेश और बिहार में गिरे ओले गोल्फ की गेंद के आकार के थे।


ओलावृष्टि की बढ़ती घटनाओं के कारण

2026 में उत्तरी भारत के मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' की बढ़ती सक्रियता है। ये पश्चिम से आने वाले मौसम तंत्र हैं जो हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश और तूफान लाते हैं। इस वर्ष ये असामान्य रूप से अधिक सक्रिय हैं।


दूसरा कारण जलवायु परिवर्तन है। ग्लोबल वार्मिंग के चलते हवा गर्म हो रही है, जिससे नमी सोखने की क्षमता बढ़ रही है। जब यह नमी तेजी से ऊपर उठती है, तो इससे शक्तिशाली बादल बनते हैं, जो ओले बनने के लिए आवश्यक हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और आसपास के राज्यों में ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है।


सुरक्षा उपाय

कैसे रहें सुरक्षित?



  • जब भी मौसम की चेतावनी जारी हो, घर के अंदर रहें।

  • खेतों में मजबूत आश्रयों या सुरक्षात्मक जालियों का उपयोग करें।

  • फलों के बागों में सुरक्षात्मक उपाय समय पर अपनाएं।

  • पुरानी इमारतों या बड़े पेड़ों के पास जाने से बचें।