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उत्तर प्रदेश के कोटेदारों का लखनऊ में प्रदर्शन, मांगें लंबित

उत्तर प्रदेश के कोटेदारों ने लखनऊ में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार से प्रति क्विंटल लाभांश बढ़ाने और अन्य मुद्दों का समाधान करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो राशन वितरण का कार्य बंद कर देंगे। जानें इस प्रदर्शन के पीछे की वजहें और कोटेदारों की समस्याएं।
 

लखनऊ में कोटेदारों का प्रदर्शन


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों कोटेदारों ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में एकत्र होकर अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के नेतृत्व में ये कोटेदार चारबाग से विधानसभा तक पैदल मार्च निकालना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें चारबाग पर ही रोक दिया।


जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे, तो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाकर बसों में बैठाया और इको गार्डन भेज दिया। इस दौरान चारबाग क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।


कोटेदारों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से अधूरी हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। उन्होंने प्रति क्विंटल मिलने वाले लाभांश को बढ़ाकर 200 रुपये करने की मांग की। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में केवल 90 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है, जो अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम है।


प्रदर्शन कर रहे कोटेदारों ने कोरोना काल के दौरान नवंबर 2021 में मुफ्त राशन वितरण का बकाया भुगतान, बाजार मूल्य पर वितरित खाद्यान्न की लंबित फंडिंग और गेहूं खरीद के लिए जमा कराई गई खाली बोरियों का भुगतान जल्द जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि इन लंबित भुगतानों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।


संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो अगस्त में पूरे प्रदेश में राशन वितरण का कार्य बंद कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आम जनता को होने वाली परेशानियों की जिम्मेदारी शासन और संबंधित विभाग की होगी।


ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश तिवारी ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा कमीशन में कोटेदारों के लिए दुकान चलाना कठिन हो गया है। उन्होंने मांग की कि गुजरात, तमिलनाडु और केरल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी कोटेदारों को नियमित मानदेय दिया जाए, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके।