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उत्तर प्रदेश में दिनेश शर्मा की नई नियुक्ति: उपराज्यपाल के रूप में जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, दिनेश शर्मा को अंडमान निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति के साथ ही उनकी राजनीतिक यात्रा में एक नया मोड़ आया है। जानें उनके पिछले कार्यकाल, राजनीतिक अनुभव और इस नियुक्ति के पीछे की संभावित वजहें। क्या यह ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक कदम है? पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
 

बीजेपी की नई टीम और दिनेश शर्मा की नियुक्ति

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इस बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी नई टीम का गठन कर लिया है। इस बदलाव से पहले एक महत्वपूर्ण घटना घटित हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिनेश शर्मा, जो कि वर्तमान राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री हैं, को अंडमान निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त किया है। इससे पहले, एडमिरल डी के जोशी इस पद पर कार्यरत थे। इस नियुक्ति से यह स्पष्ट हो गया है कि दिनेश शर्मा को केंद्र सरकार में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं मिलने वाली है।


दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर

सितंबर 2023 में राज्यसभा के सदस्य बने दिनेश शर्मा पहले दिल्ली उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने योगी आदित्यनाथ की सरकार में 2017 से 2022 तक उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। 2022 के चुनावों के बाद, ब्रजेश पाठक को उनकी जगह उपमुख्यमंत्री बनाया गया। शर्मा राज्यसभा में उपराष्ट्रपति द्वारा निर्धारित पैनल के सदस्य रहे हैं और फाइनेंस कमेटी, आधिकारिक भाषा कमेटी सहित कई अन्य समितियों में भी कार्यरत रहे हैं.


दिनेश शर्मा की प्रतिक्रिया

दिनेश शर्मा ने अपनी नई जिम्मेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'महामहिम राष्ट्रपति जी, माननीय प्रधानमंत्री जी, माननीय गृहमंत्री जी एवं पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का आभार। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए मैं सभी सम्मानित वरिष्ठजनों, शुभचिंतकों, मित्रों एवं देशवासियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि संविधान, राष्ट्र और जनसेवा के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। मैं पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ इस दायित्व का निर्वहन करने का संकल्प लेता हूं।'


दिनेश शर्मा का राजनीतिक अनुभव

दिनेश शर्मा, जो सक्रिय राजनीति में हैं, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रह चुके हैं और लखनऊ के मेयर भी रहे हैं। 2014 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। वह जिस सीट से राज्यसभा के सांसद हैं, उसका कार्यकाल नवंबर 2026 तक है, लेकिन अब उन्हें इस्तीफा देना होगा.


ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व

यह माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति ब्राह्मण समाज की नाराजगी को देखते हुए की गई है। दिनेश शर्मा को सौम्य छवि और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है, और वह विवादों से दूर रहकर बीजेपी के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। यूपी के चुनावों से पहले उन्हें एक महत्वपूर्ण पद देकर बीजेपी ने ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है.