उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: राजनीतिक खींचतान और मुस्लिम-दलित वोटों की जंग
उत्तर प्रदेश में चुनावी हलचल
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और इसको लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए एकजुटता बनाए हुए है, क्योंकि उसकी सहयोगी पार्टियों के नेता केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जिससे वे राज्य की राजनीति में ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पा रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन में मुस्लिम और दलित वोटों को लेकर तीव्र प्रतिस्पर्धा चल रही है। कांग्रेस और सपा एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़कर सपा का हाथ थाम लिया, जबकि वे पहले बसपा में थे। कांग्रेस इसे अपनी राजनीतिक स्थिति के लिए चुनौती मानती है.
सपा और कांग्रेस के बीच की मुलाकात
हाल ही में, उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सपा के प्रमुख मुस्लिम नेता आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा से मुलाकात की। इसे शिष्टाचार की मुलाकात बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोण से इसकी गहराई को समझा जा सकता है। आजम खान के परिवार के प्रति बसपा के नेताओं ने भी सद्भाव दिखाया है। यह माना जा रहा है कि आजम खान के खिलाफ सैकड़ों मुकदमे और जेल में बिताया गया समय उनके सपा से मोहभंग का कारण बन सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आजम खान का परिवार सपा छोड़कर बसपा या कांग्रेस में शामिल होगा। इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की मुलाकात ने राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। तंजीम फातिमा पूर्व सांसद रह चुकी हैं, और सपा के नेता पहले से ही अजय राय पर नियंत्रण की आवश्यकता की बात कर रहे थे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने उन्हें खुली छूट दे रखी है, जिससे यूपी की राजनीति में दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है.