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उत्तरकाशी में ट्रैकिंग सुरक्षा मानकों में बदलाव की तैयारी

उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर हाल ही में हुए हादसे के बाद, जिला प्रशासन ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के सुरक्षा मानकों में बदलाव करने की योजना बना रहा है। 2021 से अब तक 53 से अधिक ट्रैकर्स की मौतें हो चुकी हैं, जिससे सुरक्षा नियमों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने नए सुरक्षा मानकों को लागू करने का आश्वासन दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कदम उठाए जाएंगे।
 

उत्तरकाशी में ट्रैकिंग सुरक्षा मानकों में बदलाव

उत्तरकाशी: हाल ही में केदारताल ट्रैक पर हुए एक दुखद हादसे के बाद, उत्तराखंड का जिला प्रशासन ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में संशोधन करने की योजना बना रहा है। हालांकि, इस प्रयास ने सुरक्षा व्यवस्था और उसके कार्यान्वयन पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। 2024 में सहस्त्रताल में हुए भयानक हादसे के बाद, एक नौ सदस्यीय समिति का गठन किया गया था, जिसने सख्त नियम बनाए थे, लेकिन जनपद के ट्रैकिंग मार्गों पर लगातार हो रहे जानलेवा हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।


2021 से अब तक 53 से अधिक मौतें, नियमों की अनदेखी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2021 से अब तक जनपद के विभिन्न उच्च हिमालयी ट्रैकिंग रूटों पर हिमस्खलन, बर्फीले तूफान और खराब मौसम के कारण 53 से अधिक ट्रैकर्स अपनी जान गंवा चुके हैं। 2024 में सहस्त्रताल ट्रैक पर बर्फीले तूफान में फंसने से नौ ट्रैकर्स की मौत हो गई थी। इस त्रासदी के बाद, जिलाधिकारी के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी, लेकिन प्रभावी निगरानी के अभाव में हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।


सैटेलाइट फोन और मेडिकल ट्रेनिंग के नियम कागजों में दफन
दो वर्ष पूर्व बनाई गई एसओपी में यह अनिवार्य किया गया था कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने वाले प्रत्येक ट्रैकिंग दल के पास सैटेलाइट फोन होना चाहिए। इसके अलावा, ट्रैकिंग गाइड के लिए मान्यता प्राप्त पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और न्यूनतम अनुभव की आवश्यकता भी रखी गई थी। दल में शामिल ट्रैकर्स की संख्या के अनुपात में गाइड, पोर्टर और कुक की तैनाती के साथ-साथ सहायक स्टाफ को बुनियादी मेडिकल और फर्स्ट एड प्रशिक्षण देने का प्रावधान भी था। लेकिन, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने में असफल रहे हैं।


DM प्रशांत आर्य का बयान
हादसों के बाद उपजे जनआक्रोश के बीच, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा है कि ट्रैकिंग और पर्वतारोहण को सुरक्षित बनाने के लिए एसओपी में नए सुरक्षा मानक जोड़े जाएंगे। उन्होंने बताया कि मौसम के पूर्वानुमान, ट्रैकिंग दलों के दैनिक पंजीकरण और आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर नियमों को सख्त किया जाएगा। इसके साथ ही, नियमों की अनदेखी करने वाली ट्रैकिंग एजेंसियों और ऑपरेटरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।