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उत्तराखंड चुनाव 2027: हरीश रावत की भूमिका और बीजेपी का राजनीतिक दृष्टिकोण

उत्तराखंड चुनाव 2027 में हरीश रावत की राजनीतिक भूमिका और बीजेपी की रणनीति पर चर्चा हो रही है। जानें क्यों बीजेपी बार-बार हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल को चुनावी विमर्श में लाती है। क्या हरीश रावत कांग्रेस के लिए एक ताकत बने रहेंगे या बीजेपी के लिए चुनौती? इस लेख में हम इन सवालों का विश्लेषण करेंगे।
 

हरीश रावत का राजनीतिक महत्व

देहरादून: कांग्रेस के लिए हरीश रावत की अहमियत को पार्टी ही समझती है, लेकिन बीजेपी के चुनावी रणनीति में उनका स्थान लगातार नजर आता है। आखिर बीजेपी क्यों बार-बार हरीश रावत के राजनीतिक सफर और उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल को चुनावी चर्चाओं में लाती है? इसका कारण उत्तराखंड की राजनीति और कांग्रेस के पूर्व शासन से जुड़ा संदर्भ है।


उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत उन कांग्रेस नेताओं में से हैं, जिनका नाम पार्टी के पिछले शासनकाल से गहराई से जुड़ा हुआ है। पिछले एक दशक से बीजेपी राज्य में सत्ता में है, जबकि कांग्रेस ने भी लंबे समय तक शासन किया है।


कांग्रेस के उस समय के कई प्रमुख चेहरे अब सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का निधन हो चुका है, और विजय बहुगुणा अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में, बीजेपी के पास हरीश रावत एक महत्वपूर्ण चेहरा हैं, जो कांग्रेस के पिछले शासनकाल का संदर्भ प्रस्तुत करते हैं।


हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए लिए गए निर्णय, उस समय के विवाद और राजनीतिक आरोप आज भी बीजेपी के चुनावी विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं। यही कारण है कि हरीश रावत की सक्रियता के साथ कांग्रेस के पुराने शासन की चर्चा भी चुनावी बहस में शामिल हो जाती है।


2022 का विधानसभा चुनाव इसका एक उदाहरण था। उस चुनाव में मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे को लेकर बीजेपी ने हरीश रावत को निशाने पर लिया और इसे कांग्रेस के खिलाफ अपने चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाया।


कांग्रेस का कहना है कि हरीश रावत पार्टी के बड़े जनाधार वाले नेताओं में से एक हैं, और चुनाव के दौरान बीजेपी का उनके बयानों और राजनीतिक भूमिका पर ध्यान इसी कारण बढ़ जाता है।


अब एक बार फिर चुनावी माहौल बन रहा है और हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। बीजेपी उनके राजनीतिक अतीत को कांग्रेस के पिछले शासन से जोड़कर देख रही है, जबकि कांग्रेस उनकी सक्रियता को पार्टी की राजनीतिक ताकत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।


इसलिए, चुनावी वर्ष में सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस हरीश रावत को कितनी राजनीतिक जगह देती है, बल्कि यह भी है कि बीजेपी के चुनावी विमर्श में हरीश रावत को कितनी जगह मिलती है।