उत्तराखंड में निहंग सिखों और प्रशासन के बीच बढ़ता तनाव
निहंग सिखों का कर्ण प्रयाग में प्रदर्शन
उत्तराखंड के कर्ण प्रयाग में निहंग सिखों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। निहंगों का एक बड़ा समूह कर्ण प्रयाग को घेरने की योजना बना रहा है। शुक्रवार की रात को निहंग सिखों और उत्तराखंड पुलिस के बीच झड़पें हुईं। निहंग संगठनों का एक जत्था मोहाली स्थित गुरुद्वारा सिंह शहीदान से देहरादून की ओर बढ़ रहा था, लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिमाचल-उत्तराखंड सीमा पर रोक दिया।
निहंगों की मांगें
इस प्रदर्शन का नेतृत्व निहंग जसदीप सिंह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली, उस पुलिस अधिकारी को नौकरी से हटाया जाए जिसने 'सिंहों' के खिलाफ मामला दर्ज किया। दूसरी, दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। तीसरी, जिन अधिकारियों ने निहंगों को बिना किसी कारण के पुलिस स्टेशन में रखा, उन्हें भी नौकरी से निकाला जाना चाहिए।
निहंगों का लौटने का निर्णय
निहंग सिखों और प्रशासन के बीच लंबी बातचीत के बाद, अधिकांश निहंग सिख वापस लौटने के लिए सहमत हो गए। गुरुवार को हुई बातचीत के बाद, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई। सैकड़ों निहंग सिख पांवटा साहिब गुरुद्वारे से निकलकर कुल्हाल चेक पोस्ट पर इकट्ठा हुए थे।
पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था
जब बातचीत विफल रही, तो पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी। बॉर्डर पर बैरिकेडिंग की गई और सड़कें बंद कर दी गईं। बातचीत के बाद, निहंग छोटे समूहों में वापस हिमाचल लौटने के लिए तैयार हुए। कुछ निहंगों को देहरादून के गुरुद्वारा गोबिंद नगर रेसकोर्स में ठहराया गया, जहां प्रशासन से बातचीत जारी है।
टकराव का कारण
16 जून को कर्णप्रयाग में पार्किंग विवाद और नागरासू गुरुद्वारे में खाने-पीने को लेकर प्रशासनिक विवाद के कारण यह टकराव हुआ। हालांकि, दोनों घटनाएं अलग हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर इन्हें जोड़कर अफवाहें फैलाई गईं। पुलिस ने इन अफवाहों को खारिज किया है। चार धाम और हेमकुंड साहिब यात्रा चल रही है, इसलिए प्रशासन सिख नेताओं के साथ संपर्क बनाए हुए है।