×

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के तहत वक्फ बोर्ड का नया निकाहनामा

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद, वक्फ बोर्ड ने निकाह की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नया निकाहनामा केवल एक विवाह का प्रावधान करेगा, जबकि अन्य विवाहों के लिए कोई कॉलम नहीं होगा। मौलवियों को इन नए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, विवाहों का सरकारी पंजीकरण भी आवश्यक होगा। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और यूसीसी का महत्व।
 

वक्फ बोर्ड का नया निर्णय

देहरादून- उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद, वक्फ बोर्ड ने निकाह की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब बोर्ड एक नया निकाहनामा जारी करने की योजना बना रहा है, जिसमें केवल एक विवाह का प्रावधान होगा। नए निकाहनामे में किसी भी अन्य विवाह के लिए कॉलम नहीं होगा।


मौलवियों के लिए नए नियम

वक्फ बोर्ड के अनुसार, मस्जिदों में निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं और मौलवियों को इन नए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि पहली पत्नी जीवित है और कानूनी तलाक नहीं हुआ है, तो मौलवी दूसरा निकाह नहीं पढ़ा सकेंगे। यूसीसी के तहत ऐसे विवाह के लिए कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान है।


सरकारी पंजीकरण की अनिवार्यता

निकाह का सरकारी पंजीकरण होगा अनिवार्य


उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, केवल पंजीकृत मौलवी ही निकाह करा सकेंगे। इसके साथ ही, निकाहनामे का सरकारी स्तर पर पंजीकरण भी अनिवार्य होगा, जिससे विवाहों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना आसान होगा।


यूसीसी का महत्व

यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य


उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता जनवरी 2025 में लागू की गई थी, जिससे यह देश का पहला राज्य बन गया है जहां यूसीसी को लागू किया गया। इसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के स्थान पर समान नियम लागू करना है।


समान नागरिक संहिता क्या है?

क्या है समान नागरिक संहिता?


समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का अर्थ है कि राज्य के नागरिकों के लिए व्यक्तिगत नागरिक मामलों से जुड़े समान कानूनी नियम लागू हों, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों जैसे विषय शामिल हैं। उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद, इन मामलों को एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाने की व्यवस्था की गई है।