उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद को एक महत्वपूर्ण झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका की समीक्षा की मांग वाली रिव्यू याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजरिया की पीठ ने 16 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है। खालिद ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल के माध्यम से खुली अदालत में सुनवाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया।
खुली अदालत में सुनवाई का अनुरोध
उमर खालिद के वकील कपिल सिब्बल ने 13 अप्रैल को जस्टिस अरविंद कुमार के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए अनुरोध किया था कि रिव्यू याचिका को खुली अदालत में सुना जाए। हालांकि, जस्टिस कुमार ने संक्षेप में कहा कि वे दस्तावेजों की समीक्षा करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर इसे बुला लेंगे। अंततः, अदालत ने यह निर्णय चैंबर में ही सुनाया। न्यायाधीशों ने कहा कि रिव्यू याचिका और उससे संबंधित दस्तावेजों को पढ़ने के बाद उन्हें इस पर कोई दलील सुनने की आवश्यकता नहीं महसूस हुई।
मामले का सारांश और सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
उमर खालिद पर फरवरी 2020 में दिल्ली के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हुए सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचने का आरोप है, जिसमें 53 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ प्राथमिक तौर पर मामला बनता है। अदालत ने खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम को साजिश का "केंद्रीय और रचनात्मक" हिस्सा बताया था।
उमर खालिद की हिरासत
उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से जेल में हैं, जबकि शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से हिरासत में हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों की भूमिका अन्य आरोपियों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। जनवरी में जमानत देते समय अदालत ने पांच अन्य आरोपियों को राहत दी थी, लेकिन कहा था कि खालिद और इमाम उनसे "गुणात्मक रूप से अलग" हैं।
रिव्यू याचिका के खारिज होने के परिणाम
रिव्यू याचिका के खारिज होने का अर्थ है कि सुप्रीम कोर्ट अपने जनवरी के फैसले में कोई बदलाव नहीं करेगा। खालिद के वकीलों का तर्क था कि उन्हें बिना ट्रायल के सजा दी जा रही है, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। जस्टिस कुमार और अंजरिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि रिव्यू याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है। अब उमर खालिद के पास सुप्रीम कोर्ट में इससे ऊपर कोई विकल्प नहीं बचा है।