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ऋषिकेश बाईपास के लिए ₹1105 करोड़ की मंजूरी, धामी सरकार की बड़ी उपलब्धि

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से ऋषिकेश बाईपास के चार-लेन निर्माण के लिए ₹1105 करोड़ की स्वीकृति मिली है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर विकसित की जाएगी और इससे क्षेत्र में यातायात की समस्या में कमी आएगी। जानें इस महत्वपूर्ण परियोजना के बारे में और इसके संभावित लाभों के बारे में।
 

मुख्यमंत्री धामी की पहल से मिली स्वीकृति

उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लगातार प्रयासों और प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, ऋषिकेश बाईपास के चार-लेन निर्माण कार्य को भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से महत्वपूर्ण स्वीकृति प्राप्त हुई है। मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए ₹1105.79 करोड़ की तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की है।


परियोजना का विवरण

यह बहुप्रतीक्षित बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर टीनपानी फ्लाईओवर (किमी 529.750) से लेकर खरासोटे पुल (किमी 542.420) तक विकसित किया जाएगा। लगभग 12.670 किलोमीटर लंबा यह बाईपास भट्टोवाला और ढालवाला गांवों से होकर गुजरेगा और इसे EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन) मोड में क्रियान्वित किया जाएगा।


मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री धामी ने इस स्वीकृति पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होगा, जाम की समस्या में राहत मिलेगी और स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ चारधाम यात्रा एवं पर्यटन गतिविधियों को भी सुविधा मिलेगी।


परियोजना की लागत और समयसीमा

मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना के लिए प्रारंभिक अनुमान ₹1151.18 करोड़ था, जिसे संशोधित कर ₹1139.40 करोड़ किया गया और अंततः ₹1105.79 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना को तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा और कार्य में किसी भी प्रकार की लागत या समय वृद्धि स्वीकार नहीं की जाएगी। निविदाएं ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से आमंत्रित की जाएंगी।


आर्थिक और पर्यटन विकास में योगदान

इस परियोजना के लिए व्यय वित्त वर्ष 2025-26 में भारत सरकार के बजट प्रावधान के अंतर्गत किया जाएगा। देहरादून स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को इस कार्य के लिए ड्रॉइंग एवं डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) नामित किया गया है। परियोजना के पूर्ण होने से ऋषिकेश क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुगम होगी, जाम की समस्या में कमी आएगी और राज्य के आर्थिक और पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी।