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एनसीईआरटी पुस्तक विवाद: अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना

कक्षा 8 की एनसीईआरटी पुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' पर विवाद ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर खेद व्यक्त किया है, लेकिन अखिलेश ने इसे दिखावटी माफी करार दिया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक निहितार्थ।
 

एनसीईआरटी पुस्तक विवाद की पृष्ठभूमि

एनसीईआरटी पुस्तक विवाद: कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान एनसीईआरटी पुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' विषय पर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इस बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया है। इस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है।


अखिलेश यादव का बयान

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एक वीडियो साझा करते हुए एक्स पर लिखा, "जैसे चोर को खांसी फंसाती है, वैसे ही गुनाहगार को झूठी माफी... भाजपा वाले पहले दूसरों पर बड़े आरोप लगाते हैं, ताकि उनके अपने भ्रष्टाचार को कमतर दिखाया जा सके। लेकिन जब वे पकड़े जाते हैं, तो 'खेद' प्रकट करते हैं। दिखावटी माफी अंततः पकड़ी जाती है, और ऐसे धूर्त लोगों की असली मंशा का पर्दाफाश होता है।"


धर्मेंद्र प्रधान का स्पष्टीकरण

एनसीईआरटी किताब विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान का बयान:

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संवाददाताओं से कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अध्याय शामिल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और एनसीईआरटी को सभी पुस्तकें वापस लेने का निर्देश दिया है। प्रधान ने यह भी कहा कि सरकार का न्यायिक प्रणाली का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है।