एनसीपी के विलय की संभावना: अजित पवार और शरद पवार की बैठक में चर्चा
एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय
हालांकि अजित पवार इस बात से इनकार कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि शरद पवार की पार्टी एनसीपी के दोनों हिस्सों का विलय होने की संभावना है। यह केवल समय की बात है। उल्लेखनीय है कि दोनों दलों के नेता अभी भी चुनाव परिणामों से सदमे में हैं। पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और परभणी में जो नतीजे आए, उनकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। हालांकि, यह भी सच है कि 2017 के नगर निगम चुनाव में भी इन क्षेत्रों में भाजपा और शिवसेना ने जीत हासिल की थी। इस बार अजित पवार ने सोचा था कि चाचा शरद पवार के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से खोई हुई जमीन वापस पाई जा सकती है। यह क्षेत्र पवार परिवार का पारंपरिक गढ़ रहा है, जहां बारामती स्थित है, जिसे पवार परिवार ने विकसित किया है। हाल ही में, गौतम अडानी भी वहां एक एआई सेंटर ऑफ एक्सलेंस के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जो पवार परिवार द्वारा स्थापित किया गया है।
फिर भी, 16 जनवरी को वोटों की गिनती के बाद पवार परिवार में खामोशी थी। लेकिन शरद पवार एक अनुभवी नेता हैं और उन्होंने तुरंत स्थिति को संभालते हुए दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक बुलाई। इस बैठक को लेकर दो तरह की बातें सामने आई हैं। बारामती में हुई इस बैठक में अजित पवार शामिल हुए, लेकिन उन्होंने यह कहा कि एनसीपी के विलय पर कोई चर्चा नहीं हुई। उनका कहना था कि यह एक सार्वजनिक कार्यक्रम था, जिसमें शामिल होने की जानकारी उन्हें मिली थी। दूसरी ओर, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने मीडिया को बताया कि बैठक का उद्देश्य चुनाव परिणामों पर विचार करना और दोनों दलों की एकता पर चर्चा करना था।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में यह चर्चा हुई कि दोनों दलों के उम्मीदवारों को घड़ी के प्रतीक पर चुनाव लड़ना चाहिए था। घड़ी एनसीपी का पुराना चुनाव चिन्ह है, जबकि शरद पवार की पार्टी का चिन्ह तुताड़ी है। पार्टी के नेता मानते हैं कि दोनों एनसीपी में गठबंधन था, लेकिन अलग-अलग चुनाव चिन्हों पर लड़ने से मतदाताओं में भ्रम पैदा हुआ। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि कई स्थानों पर अजित पवार की पार्टी भाजपा और शिवसेना के साथ भी चुनाव लड़ रही थी। इसलिए, जहां उनके उम्मीदवार नहीं थे, वहां उनके समर्थक महायुति को वोट दे रहे थे। इसी तरह, जहां शरद पवार के उम्मीदवार नहीं थे, वहां कुछ वोट कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की पार्टी को चले गए। इसे प्रचार की कमी भी माना जा रहा है। लेकिन अब एकजुट होने का समय आ गया है। इसलिए, यह संभव है कि जल्द ही शरद पवार की पार्टी का विलय अजित पवार की पार्टी में हो जाए। कहा जा रहा है कि शरद पवार अपनी पार्टी के संरक्षक बनेंगे और पार्टी की कमान अजित पवार के हाथ में होगी। दिल्ली की राजनीति सुप्रिया सुले संभालेंगी। हालांकि, अजित पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्यसभा में भेजा है, लेकिन कहा जा रहा है कि उनका दिल्ली की राजनीति में मन नहीं लग रहा है। विलय के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शरद पवार राज्यसभा जाएंगे और सुप्रिया सुले नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री बनेंगी।