एफसीआरए विधेयक 2026: सरकार की रणनीति और विपक्ष की चुनौतियाँ
एफसीआरए विधेयक पर चर्चा
एफसीआरए विधेयक 2026: केंद्र सरकार एफसीआरए विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के विकल्प पर विचार कर रही है। विधेयक को संसद में आगे बढ़ाने से पहले इसकी गहन जांच के लिए समिति के पास भेजने की योजना बनाई जा रही है। प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और विपक्षी नेताओं से भी बातचीत कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य विधेयक पर चल रहे गतिरोध को समाप्त करना है। एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं। विपक्ष का मानना है कि विदेशी योगदान से संबंधित नियमों में बदलाव पर व्यापक चर्चा आवश्यक है। जेपीसी के विकल्प पर विचार के बाद, संसद में विधेयक को लेकर आगे की रणनीति पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
रिजिजू की सक्रियता
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद, किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से चर्चा की। इससे पहले, उन्होंने विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं से भी बातचीत की। यह माना जा रहा है कि सरकार संसद में एफसीआरए विधेयक को लेकर किसी भी प्रकार का बड़ा गतिरोध नहीं चाहती, इसलिए सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष की स्थिति
विपक्षी दलों की मांग सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। कई दलों का कहना है कि केवल विधेयक को जेपीसी में भेजना पर्याप्त नहीं होगा। विपक्ष के एक हिस्से की मांग है कि विधेयक को मौजूदा स्वरूप में वापस लिया जाए और फिर सभी पक्षों से चर्चा करके नए प्रावधानों पर विचार किया जाए।
सुप्रिया सुले की मांग
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने भी एफसीआरए विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से इसे वापस लेने या जेपीसी को भेजने की मांग की है। उनका तर्क है कि विदेशी योगदान से संबंधित नियमों पर व्यापक चर्चा आवश्यक है, क्योंकि ऐसे कानून का प्रभाव सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों पर भी पड़ सकता है।
डीएमके की पहल
डीएमके भी एफसीआरए विधेयक का विरोध कर रही है। पार्टी के सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। डीएमके ने विधेयक को वापस लेने की मांग की है और मौजूदा कानून की धारा 15 को हटाने की भी मांग की है। इसके अलावा, पार्टी ने कानून की व्यापक समीक्षा और विधेयक को जेपीसी के पास भेजने की मांग की है।
कांग्रेस और अन्य दलों का विरोध
एफसीआरए विधेयक के खिलाफ कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों समेत कई विपक्षी पार्टियों ने आपत्ति जताई है। इस स्थिति में, सरकार के सामने संसद में सहमति बनाने की चुनौती है। सोमवार को हुई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में एफसीआरए विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का उल्लेख नहीं हुआ, जिससे संसद के मौजूदा सत्र में दोनों विधेयकों को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं।
सरकार की अगली रणनीति
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार एफसीआरए विधेयक को जेपीसी के पास भेजने का निर्णय लेगी या इसे मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाएगी। विपक्ष की मांग और सरकार की रणनीति के बीच, आने वाले दिनों में संसद में इस विधेयक को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज हो सकती हैं।