एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन का इस्तीफा, एयरलाइंस में नेतृत्व परिवर्तन
कैंपबेल विल्सन का इस्तीफा
एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। टाटा ग्रुप की इस एयरलाइन ने पिछले वर्ष कई गंभीर चुनौतियों का सामना किया, जिसमें एक भयानक विमान दुर्घटना भी शामिल है। विल्सन का इस्तीफा उस समय आया है जब इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने भी हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया। वर्तमान में, भारत की दो प्रमुख एयरलाइंस, एयर इंडिया और इंडिगो, नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं।
विमान दुर्घटना और सुरक्षा चिंताएं
जून 2025 में, एयर इंडिया का बोइंग 787 विमान अहमदाबाद के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद, एयरलाइन पर नियामकों की कड़ी निगरानी बढ़ गई। दुर्घटना के बाद कई सुरक्षा संबंधी खामियां उजागर हुईं। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया को बिना वैध एयरवर्दीनेस सर्टिफिकेट वाले विमानों का संचालन करने और आपातकालीन उपकरणों की जांच न करने के लिए चेतावनी दी गई। एयरलाइन ने स्वीकार किया कि उसे अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं में सुधार करना होगा।
बाहरी चुनौतियों का सामना
इसके अतिरिक्त, एयर इंडिया को बाहरी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे यूरोप और अन्य देशों की उड़ानें लंबी हो गईं और ईंधन की खपत बढ़ गई। मार्च में, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण एयर इंडिया को वहां की 2,500 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। सामान्य उड़ानों का केवल 30% संचालन हो पाया, जिससे यूरोप और अमेरिका की उड़ानों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
वित्तीय संकट
वित्तीय दृष्टिकोण से भी एयर इंडिया को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 2024-25 में, एयर इंडिया और उसकी लो-कॉस्ट शाखा को मिलाकर 98.08 अरब रुपये का नुकसान हुआ। इसके बावजूद, कंपनी नई विमानों की खरीद और पुराने विमानों के सुधार में निवेश कर रही है।
इंडिगो की समस्याएं
इंडिगो को दिसंबर 2025 में भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। पहले सप्ताह में ही लगभग 4,500 उड़ानें रद्द हो गईं, जिसका कारण पायलटों की थकान से संबंधित नए सख्त नियमों के लिए क्रू रोस्टर का समय पर अपडेट न होना था।
सरकार की निगरानी
सरकार ने संसद में बताया कि एयरलाइन ने अपने कार्यों को अधिकतम किया था, लेकिन नियामक तैयारियों में कमी थी और सिस्टम में खामियां थीं। इसके बाद, सरकार ने सभी एयरलाइंस पर निगरानी बढ़ा दी। इसी दबाव के कारण मार्च में इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने इस्तीफा दे दिया। अब कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया अस्थायी रूप से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
दबाव में दोनों एयरलाइंस
पिछले वर्ष, दोनों प्रमुख एयरलाइंस पर कई प्रकार के दबाव थे, जैसे ईंधन की बढ़ती कीमतें, बीमा खर्चों में वृद्धि, और युद्ध क्षेत्रों के कारण एयरस्पेस बंद होना। इन सभी चुनौतियों के बावजूद, दोनों कंपनियां अपने संचालन को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।
एयर इंडिया का पुनर्निर्माण
एयर इंडिया अब टाटा ग्रुप के अधीन अपने पुराने स्वरूप को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। दोनों एयरलाइंस के सीईओ के इस्तीफे से भारत के विमानन क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।