एयर इंडिया ने तीन वर्षों में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को निकाला, CEO ने दी जानकारी
कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की एयरलाइन एयर इंडिया ने अपने कर्मचारियों के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई की है। कंपनी ने नैतिकता और नियमों के उल्लंघन के आरोप में पिछले तीन वर्षों में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। एयर इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने एक टाउनहॉल मीटिंग में इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में अनुशासनहीनता के कारण हर साल सैकड़ों कर्मचारियों को बाहर किया जाता है। निकाले गए कर्मचारियों में वे भी शामिल हैं जो एयर इंडिया की उड़ानों से सामान की तस्करी और यात्रियों को बिना निर्धारित शुल्क के अधिक सामान ले जाने की अनुमति देने में संलिप्त पाए गए थे।
ट्रेवल पॉलिसी का दुरुपयोग
कर्मचारी अवकाश यात्रा प्रणाली (ELT) का दुरुपयोग
सीईओ कैंपबेल विल्सन ने टाउनहॉल मीटिंग में कर्मचारी अवकाश यात्रा प्रणाली (ELT) के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। हाल ही में यह सामने आया था कि एयर इंडिया ने इस नीति के तहत 4,000 से अधिक कर्मचारियों के बीच अनियमितताएं पाई हैं। कंपनी ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए दोषी कर्मचारियों पर भारी जुर्माना लगाया है और कई अन्य दंडात्मक उपाय भी किए हैं। वर्तमान में एयर इंडिया के पास लगभग 24,000 कर्मचारियों की कार्यबल है, और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रबंधन की नजर बनी हुई है।
सैलरी में वृद्धि पर रोक
वित्तीय दबाव और खर्चों में कटौती
वित्तीय संकट और भारी घाटे से जूझ रही एयर इंडिया ने लागत में कटौती के लिए कठोर कदम उठाए हैं। इसी के तहत कंपनी ने इस वर्ष अपने कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को गैर-जरूरी खर्चों में तुरंत कटौती करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति में कंपनी की आर्थिक स्थिति को स्थिर करना प्राथमिकता है।
वैश्विक संकट का असर
पश्चिम एशिया के तनाव से बढ़ा घाटे का खतरा
एयर इंडिया को केवल आंतरिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात जल्दी नहीं सुधरते हैं, तो यह वर्ष कंपनी के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा हो गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण परिचालन लागत में तेजी से वृद्धि हो रही है। इन सभी कारणों से एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा होने का अनुमान है।