×

एस्ट्रोनॉट्स की आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी

अंतरिक्ष में आपातकालीन स्थितियों का सामना करने के लिए एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग बेहद महत्वपूर्ण होती है। भारतीय वायुसेना के कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक वीडियो में बताया कि एस्ट्रोनॉट्स अपना अधिकांश समय उन परिस्थितियों की तैयारी में बिताते हैं जब चीजें गलत हो जाती हैं। जानें कि कैसे वे आग और जहरीली गैस के रिसाव जैसी गंभीर स्थितियों का सामना करते हैं और उनकी ट्रेनिंग में क्या शामिल होता है।
 

आपातकालीन स्थितियों के लिए एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग


अंतरिक्ष में किसी भी मिशन के दौरान आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि एस्ट्रोनॉट्स को इन परिस्थितियों के लिए कैसे तैयार किया जाता है। भारतीय वायुसेना के कैप्टन और एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने इस विषय पर एक पुराना वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने विस्तार से जानकारी दी है।


शुभांशु ने बताया कि एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आपात स्थितियों से निपटने का अभ्यास है। उनके अनुसार, एस्ट्रोनॉट्स अपना लगभग 80 प्रतिशत समय उन परिस्थितियों की तैयारी में बिताते हैं जब चीजें गलत हो जाती हैं, जिसे एयरोस्पेस में 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो' कहा जाता है। इसका अर्थ है कि जब सब कुछ योजना के अनुसार नहीं चलता, तो क्या करना चाहिए।


अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर सबसे गंभीर आपात स्थितियां आग लगने या जहरीली गैस के रिसाव की होती हैं। इनसे निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को विस्तृत और व्यवस्थित ट्रेनिंग दी जाती है। सबसे पहले नियम है – खुद को सुरक्षित करना। यदि एस्ट्रोनॉट खुद असुरक्षित है, तो वह दूसरों की मदद नहीं कर सकता। एक स्वस्थ और सक्षम एस्ट्रोनॉट पूरे क्रू को बचाने में मदद कर सकता है।


शुभांशु ने वीडियो में इमरजेंसी ऑक्सीजन मास्क पहनकर दिखाया। उन्होंने बताया कि यह मास्क तब उपयोगी होता है जब स्पेस स्टेशन में जहरीली गैस का रिसाव होता है। यह मास्क देखने में साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन इसकी डिजाइन पूरी तरह से व्यावहारिक है। तनाव की स्थिति में यह आसानी से फूल जाता है।


उन्होंने हवाई जहाज की सुरक्षा घोषणा का उदाहरण देते हुए कहा कि "पहले खुद का ऑक्सीजन मास्क लगाएं, फिर दूसरों की मदद करें" वाली सलाह केवल प्लेन के लिए नहीं है। यह सिद्धांत पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भी लागू होता है। अंतरिक्ष मिशन बेहद जटिल होते हैं, और छोटी-सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए एस्ट्रोनॉट्स को बार-बार ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो की ट्रेनिंग दी जाती है ताकि असली संकट में वे शांत रहकर सही निर्णय ले सकें।