ऑपरेशन सिंदूर: एक गुप्त सैन्य मिशन की अनकही कहानी
ऑपरेशन सिंदूर की रहस्यमय तैयारी
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह एक रहस्य, सस्पेंस और सटीक योजना की कहानी है जो सुनने पर रोंगटे खड़े कर देती है। लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने बताया कि हमले की तारीख तक किसी को फोन पर नहीं बताया गया।
कमांडर को सील बंद चिट
"इसे खोलना मत, कमांडर को दे देना"
नॉर्दन कमांड के GOC-in-C रहे लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने कहा, "मुझे कोई सूचना नहीं मिली कि हमला कब होगा। हमारा उद्देश्य दुश्मन को चौंकाना था।" इसके लिए उन्होंने एक ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी को दिल्ली भेजा।
आर्मी चीफ ने उसे एक सीलबंद चिट दी और कहा, "इसे मत खोलना। बस आर्मी कमांडर को दे देना, वो खुद खोलेगा।" यह चिट 6 मई को खोली गई। उसी दिन शाम को शर्मा को असली जानकारी मिली, और उन्होंने इसे सभी से छिपा कर रखा।
वॉर रूम का तनाव
वॉर रूम में भारी सन्नाटा
वॉर रूम में हल्की रोशनी थी, दीवारों पर नक्शे और मॉनिटर्स पर लाइव सैटेलाइट फीड चल रहा था। कमरे में केवल सांसों और दिल की धड़कन की आवाज सुनाई दे रही थी। हर सेकंड का वजन बढ़ता जा रहा था।
नॉर्दन कमांड सेना की 7 ऑपरेशनल कमांड्स में सबसे संवेदनशील मानी जाती है। LOC और चीन सीमा की सुरक्षा से लेकर आतंकवाद विरोधी अभियानों तक सभी जिम्मेदारियां इसी कमांड के अंतर्गत आती हैं। इसके GOC-in-C, प्रतीक शर्मा, उस क्षेत्र के प्रमुख थे।
6 मई की रात का रहस्य
6 मई की शाम और "जय हिंद"
शर्मा को हमले की तारीख 6 मई की सुबह ही पता चली, जबकि हमला उसी रात होना था। शाम 6 बजे उन्होंने अपनी टीम को कहा, "पैकअप करो, 10.30 बजे मिलते हैं।" इसके बाद चुपचाप एक कार लेकर निकल गए। घर में किसी को भनक तक नहीं लगी। "सिर्फ एक गार्ड ने चिल्लाकर कहा - जय हिंद।"
DGMO रहे लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने भी ऐसा ही किया। 6-7 मई से पहले वह देर रात तक ऑफिस में रहते थे, लेकिन उस दिन जानबूझकर शाम 7 बजे निकल गए ताकि किसी को शक न हो। उन्हें भी हमले की असली तारीख कुछ घंटे पहले ही पता चली।
डॉक्यूमेंट्री का प्रसारण
डिस्कवरी पर आई डॉक्युमेंट्री
15 अगस्त को डिस्कवरी चैनल पर 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' का प्रसारण हुआ। इसमें तीनों सेना प्रमुखों, ग्राउंड ऑफिसर्स और NSA अजीत डोभाल का ऑपरेशन के बाद का पहला विस्तृत इंटरव्यू शामिल है।
पूरे ऑपरेशन की योजना, समय और लक्ष्यों को इतनी गोपनीयता से रखा गया कि रात का अंधेरा भी उससे कम गहरा था। ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि युद्ध केवल गोले-बारूद से नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और गुप्तता से भी जीते जाते हैं।