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ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सैन्य शक्ति का अद्वितीय प्रदर्शन

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य शक्ति को एक नई पहचान दी है। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 13 विमानों को नष्ट किया और 11 बेस को ध्वस्त किया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने इस कार्रवाई को 'गोल्ड स्टैंडर्ड' करार दिया है, जो भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का प्रतीक है। जानें इस ऑपरेशन के बारे में और कैसे भारत ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
 

भारत की सैन्य कार्रवाई का प्रभाव

नई दिल्ली: पिछले वर्ष पहलगाम में हुए भयानक आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद, भारत ने जो जवाबी कार्रवाई की थी, उसकी गूंज आज भी पाकिस्तान में सुनाई दे रही है। भारतीय सशस्त्र बलों के उच्च अधिकारियों ने पहली बार 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता और इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की है। इस ऑपरेशन को भारतीय सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय मानते हुए थल सेना, वायुसेना और नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि कैसे भारत ने दुश्मन के 13 विमानों को नष्ट किया, 11 बेस को ध्वस्त किया और 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और 'जीरो टॉलरेंस' नीति का एक बड़ा प्रमाण बन गई है।


ऑपरेशन का महत्व

सैन्य इतिहास का 'गोल्ड स्टैंडर्ड'

इस पूरी कार्रवाई के दौरान डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने पहलगाम के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से 'गोल्ड स्टैंडर्ड' करार दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने सेना को पूरी पेशेवर छूट और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए थे, जिसके चलते इसे बेहद सटीक तरीके से अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें 65 प्रतिशत से ज्यादा रक्षा उपकरण पूरी तरह स्वदेशी थे, जो आत्मनिर्भर भारत की ताकत का प्रतीक हैं। भारत के इस प्रचंड प्रहार के आगे पाकिस्तान इस कदर बेबस हो गया था कि उसे मजबूर होकर बातचीत और ऑपरेशन रोकने की गुहार लगानी पड़ी।


शांति की रक्षा का संकल्प

'जियो और जीने दो'

वायुसेना की अचूक मारक क्षमता और रणनीति का जिक्र करते हुए उप प्रमुख वायु स्टाफ एयर मार्शल अवधेश भारती ने बताया कि भारतीय सेना की मूल फिलॉसफी 'जियो और जीने दो' है। लेकिन अगर कोई हमारी शांति को कमजोरी समझने की जुर्रत करता है, तो हम निर्णायक और विनाशकारी प्रहार करते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही भारत का पहला हथियार अपने लक्ष्य पर सटीक बैठा, भारतीय सैनिकों का आत्मविश्वास चरम पर पहुंच गया। इस ऑपरेशन में वायु शक्ति की प्रधानता एक बार फिर साबित हुई, जहां दुश्मन की हर चाल को पहले ही भांपकर उसे नष्ट कर दिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय वायुसेना 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है।


नौसेना की भूमिका

समंदर में भी दिखा नौसेना का खौफनाक रूप

इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में केवल आसमान और जमीन पर ही नहीं, बल्कि समंदर में भी भारत ने अपना दबदबा कायम किया। डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस (DGNO) वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने बताया कि भारतीय नौसेना ने अपने बैटल कैरियर ग्रुप और पनडुब्बियों को तैनात करके दुश्मन की घेराबंदी कर दी थी। नौसेना ने न केवल स्ट्राइक्स में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि पाकिस्तानी व्यापारिक समुद्री मार्गों को भी पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया। समंदर से बने इस भारी दबाव ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया को भारत की अचूक समुद्री क्षमता और युद्ध की तैयारी का कड़ा संदेश दिया है।


भारत की नई रक्षा नीति

नए भारत की रक्षा नीति का शंखनाद

'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं करेगा। तीनों सेनाओं के बीच का बेहतरीन तालमेल, स्वदेशी हथियारों की ताकत और पूर्ण ऑपरेशनल स्वतंत्रता ने इस कार्रवाई को अजेय बना दिया। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने एक सुर में दुश्मन देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यह अंत नहीं बल्कि महज एक शुरुआत है। भारत अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा किसी भी कीमत पर करेगा और भविष्य में आने वाली किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।