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ओडिशा में RPF ने 34 नाबालिग छात्रों को सुरक्षित किया, जानें पूरी कहानी

ओडिशा के बेरहामपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने 34 नाबालिग छात्रों को सुरक्षित किया, जो बिना अभिभावक के यात्रा कर रहे थे। ये छात्र पश्चिम बंगाल से हैदराबाद के मदरसे में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। प्रशासन ने उनकी पहचान और पृष्ठभूमि की जांच शुरू कर दी है। यदि यह पाया जाता है कि छात्र अपने परिवार की सहमति से यात्रा कर रहे थे, तो उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा। अन्यथा, मानव तस्करी के संकेत मिलने पर मामला दर्ज किया जाएगा।
 

बेरहामपुर रेलवे स्टेशन पर RPF की कार्रवाई


बेरहामपुर: ओडिशा के बेरहामपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने सतर्कता दिखाते हुए फलकनुमा एक्सप्रेस से 34 नाबालिग छात्रों को सुरक्षित उतारा। ये छात्र पश्चिम बंगाल से हैदराबाद की ओर जा रहे थे, जहां उन्हें मदरसे में पढ़ाई करनी थी।


संदिग्ध परिस्थितियों में यात्रा

जब ट्रेन ने ठहराव लिया, तब RPF ने संदिग्ध परिस्थितियों में यात्रा कर रहे बच्चों को देखा और तुरंत कार्रवाई की। पूछताछ के बाद, सभी छात्रों को बाल कल्याण समिति (CWC) की देखरेख में एक शेल्टर होम में रखा गया है, जहां उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है।


मामले की जानकारी

फलकनुमा एक्सप्रेस हावड़ा से सिकंदराबाद जाने वाली ट्रेन है। RPF को सूचना मिली थी कि कुछ नाबालिग बच्चे बिना किसी अभिभावक के यात्रा कर रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर, टीम ने बेरहामपुर स्टेशन पर तलाशी अभियान चलाया।


जांच के दौरान, 34 छात्रों को अलग-अलग कोच से उतारा गया, जिनकी उम्र 12 से 17 वर्ष के बीच है।


छात्रों के बयान

पूछताछ में छात्रों ने बताया कि वे पश्चिम बंगाल से हैदराबाद के मदरसे में पढ़ाई के लिए जा रहे थे। हालांकि, अधिकारियों ने कहा है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।


प्रशासन की जांच

गंजम जिला प्रशासन ने सभी छात्रों की पहचान और पृष्ठभूमि की जांच शुरू कर दी है। प्रत्येक छात्र की सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) तैयार की जा रही है।


प्रशासन पश्चिम बंगाल और बिहार की बाल कल्याण समितियों से भी संपर्क में है। छात्रों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है, जबकि कुछ के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।


भविष्य की कार्रवाई

बाल कल्याण समिति (CWC) छात्रों के बयान और रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लेगी। यदि यह पाया जाता है कि छात्र अपने परिवार की सहमति से यात्रा कर रहे थे, तो उन्हें उनके अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा।


हालांकि, यदि मानव तस्करी या जबरन ले जाने का कोई संकेत मिलता है, तो संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा।


सुरक्षा पर ध्यान

रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए ट्रेनों में नाबालिगों की यात्रा पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी और धार्मिक संस्थानों में भर्ती जैसे मुद्दों पर बहस को फिर से तेज कर सकता है।