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ओडिशा में सेप्टिक टैंक में दम घुटने से छह लोगों की मौत

ओडिशा के कालाहांडी जिले में एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक में दम घुटने से छह लोगों की मौत हो गई है। इस घटना में एक अन्य श्रमिक की हालत गंभीर है। हादसा तब हुआ जब श्रमिक टैंक के अंदर से सामान निकालने के लिए उतरे थे। जहरीली गैस के कारण सभी बेहोश हो गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की बात सामने आई है।
 

दर्दनाक हादसा कालाहांडी में

कालाहांडी: ओडिशा के कालाहांडी जिले से एक अत्यंत दुखद घटना की सूचना मिली है। एम. रामपुर क्षेत्र के गौड़ कार्लाखुंटा गांव में एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक के अंदर दम घुटने से छह व्यक्तियों की जान चली गई। इस भयानक घटना में एक अन्य श्रमिक की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। एक साथ छह लोगों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और पीड़ित परिवारों का हाल बेहाल है।


जहरीली गैस का खतरा

जानकारी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब श्रमिक सेप्टिक टैंक के अंदर से सेंटरिंग का सामान निकालने के लिए उतरे थे। बताया गया है कि गहरे टैंक में जहरीली गैस भर गई थी और ऑक्सीजन की कमी हो गई थी। जैसे ही श्रमिक अंदर गए, वे दम घुटने के कारण बेहोश होने लगे। यह दिल दहला देने वाला था कि अंदर फंसे लोगों को बचाने के प्रयास में अन्य लोग भी टैंक में उतरते गए, लेकिन जहरीली गैस ने किसी को भी वापस लौटने का मौका नहीं दिया।


मृतकों की पहचान

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों और प्रशासन ने मिलकर सभी को टैंक से बाहर निकाला और मदनपुर रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में निमाई पाल (48), उनके बेटे आकाश पाल (28), श्रमिक आदल माझी (55), मनोरंजन हाती (27), छंदा जाला और बिपुल जाला शामिल हैं। वहीं, पंकज जानी (32) की हालत गंभीर है और उनका इलाज जारी है।


सुरक्षा मानकों की अनदेखी

इस घटना ने गांव के कई परिवारों को प्रभावित किया है और चारों ओर सन्नाटा छा गया है। मदनपुर रामपुर पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि सेप्टिक टैंक के भीतर काम करते समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। प्रशासन अब इस मामले की विस्तृत जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बिना सुरक्षा उपकरणों के श्रमिकों को इस खतरनाक स्थिति में क्यों डाला गया।