कंगना रनौत का विवादित बयान: NEET आंदोलन में शामिल युवाओं पर साधा निशाना
कंगना रनौत का नया बयान
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने NEET पेपर लीक मामले से जुड़े छात्र आंदोलन में भाग लेने वाले युवाओं, विशेषकर जेन-जी प्रदर्शनकारियों पर तीखा हमला किया है। कंगना ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन युवाओं की जीवनशैली, सोच और व्यवहार पर सवाल उठाए, जिसके बाद राजनीतिक और सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।
जेन-जी पर कंगना का हमला
मंगलवार को कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए छात्र आंदोलन में शामिल युवाओं पर निशाना साधा। उन्होंने जेन-जी (Gen Z) का उल्लेख करते हुए उन्हें 'Gen G' यानी 'जेनरेशन गटर' कहा। कंगना का आरोप है कि कुछ युवा बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्रता की बात करते हैं और केवल आजादी की नकल करना चाहते हैं। उनके अनुसार, असली स्वतंत्रता केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने से आती है।
महिला प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी
कंगना ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ महिला प्रदर्शनकारियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसी युवा महिलाएं जो बिना मेहनत किए आजाद करियर वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, वे असल में आजाद नहीं हैं। जो महिलाएं सच में स्वतंत्र होती हैं, वे बागी फैसले लेती हैं और अपने कार्यों की जिम्मेदारी खुद उठाती हैं।
जीवनशैली पर नाराजगी
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कंगना ने लिखा कि यहां एक नई पीढ़ी है, जिसे वह 'जेनरेशन गटर' कहती हैं। इनमें से कई के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ नहीं होता; वे पढ़ाई में कमजोर होती हैं, लेकिन वे अपनी आजादी का गर्व से प्रदर्शन करती हैं। वे अपने माता-पिता की कमाई पर निर्भर रहती हैं और बिना असली स्वतंत्रता के आजाद जीवन जीने की कोशिश करती हैं।
आजाद जिंदगी की कीमत
कंगना ने आगे कहा कि आजाद जिंदगी कमानी पड़ती है। अगर आप बिना जिम्मेदारी के आजाद जीवन जीने की कोशिश करते हैं, तो आप केवल एक बिगड़ी हुई हस्ती हैं। इससे पहले, उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बोलने के तरीके और व्यवहार की आलोचना की थी।
छात्र आंदोलन का संदर्भ
यह विवाद NEET पेपर लीक मामले के बाद शुरू हुए छात्र आंदोलन से संबंधित है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में सुधार थी। कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इसके बाद CJP ने जंतर-मंतर पर चल रहे अपने 36 दिन पुराने आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया।