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कक्षा 10 के छात्रों ने नहर में कूदकर महिला की जान बचाई

महराजगंज में कक्षा 10 के दो छात्रों ने नहर में कूदकर एक महिला की जान बचाई। उनकी बहादुरी और निस्वार्थता ने सभी को प्रेरित किया है। पुलिस प्रशासन ने भी उनकी सराहना की और उन्हें सम्मानित किया। जानें इस अद्भुत कार्य की पूरी कहानी और कैसे इन छात्रों ने मानवता की मिसाल पेश की।
 

संकट में साहस का परिचय देते हुए छात्रों ने किया अद्भुत कार्य


कक्षा 10 के छात्रों कृष्णा और सद्दाम ने दिखाई मानवता की मिसाल


महराजगंज में एक महिला की जान संकट में थी, जब कक्षा 10 के दो छात्रों ने बिना किसी डर के तेज बहाव वाली नहर में कूदकर उसकी जान बचाई। इन छात्रों ने साहस और समझदारी का परिचय देते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे उनकी जिंदगी बच गई। इस कार्य की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है।


यह घटना निचलौल थाना क्षेत्र की है। जब महिला के नहर में कूदने की सूचना मिली, तो पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही मसीह सेवाश्रम इंटर कॉलेज के छात्रों ने मानवता की मिसाल पेश कर दी।


कृष्णा गुप्ता, जो सेखुई के निवासी हैं, और सद्दाम हुसैन, जो कोहड़वल के निवासी हैं, ने बिना किसी डर के नहर में उतरकर महिला को बचाने का प्रयास किया। दोनों छात्रों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।


इन किशोरों की बहादुरी ने न केवल एक जीवन को बचाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसला बड़ा हो तो इंसानियत की मिसाल कायम की जा सकती है।


पुलिस प्रशासन ने किया सम्मानित


छात्रों के इस साहसिक कार्य को पुलिस प्रशासन ने गंभीरता से लिया और उनकी सराहना की। 12 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विशेष रूप से दोनों छात्रों को बुलाया गया, जहां पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।


इस अवसर पर एसपी ने दोनों छात्रों के साहस और निस्वार्थता की प्रशंसा की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


पुलिस अधीक्षक ने कहा कि संकट के समय में इन छात्रों ने जिस तरह से बिना किसी स्वार्थ के अपनी जान जोखिम में डालकर महिला की मदद की, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनका यह कार्य दूसरों को भी मुश्किल समय में मानवता के साथ आगे बढ़कर मदद करने के लिए प्रेरित करेगा।


इन दो किशोरों की हिम्मत ने एक जीवन को बचाया और पूरे क्षेत्र को यह संदेश दिया कि बहादुरी उम्र की मोहताज नहीं होती। जब इरादे मजबूत हों, तो छोटी उम्र के हाथ भी किसी की जिंदगी बचाने का बड़ा काम कर सकते हैं।