कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि: IEA का इमरजेंसी रिजर्व जारी करने की संभावना
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का प्रभाव वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) अपने रणनीतिक तेल भंडार से अतिरिक्त आपूर्ति जारी कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो IEA के सदस्य देश इमरजेंसी तेल रिजर्व जारी करने पर विचार कर सकते हैं।
IEA के पास तेल भंडार की स्थिति
IEA के पास कितना तेल भंडार है?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की स्थापना 1974 में तेल संकट के बाद की गई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और किसी भी बड़े सप्लाई संकट के समय सदस्य देशों की सहायता करना है। IEA में कुल 32 सदस्य देश शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस संगठन के सदस्यों के पास 1.2 अरब बैरल से अधिक का सार्वजनिक आपातकालीन तेल भंडार है। इसके अलावा, उद्योगों के पास भी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त तेल भंडारण उपलब्ध है।
पिछले अनुभव और भविष्य की संभावनाएं
पहले भी खोला जा चुका है तेल भंडार
IEA ने पहले भी कई बार तेल भंडार जारी किया है। 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 में तूफान कैटरीना, 2011 के लीबिया संकट और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए रिजर्व का उपयोग किया गया था। मार्च 2026 में, IEA ने 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की थी, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति को संतुलित किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, इसका पूरा आवंटन अभी तक बाजार में नहीं आया है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ेगा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह चिंता का विषय है। वर्तमान में, पूरी दुनिया अमेरिका-ईरान तनाव और तेल बाजार की गतिविधियों पर नजर रख रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर जाती हैं, तो IEA का इमरजेंसी रिजर्व एक बार फिर वैश्विक बाजार को राहत देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।