कनिमोई का पीएम मोदी के काले टीके पर तीखा जवाब
संसद में कनिमोई का जवाब
संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन, द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) की सांसद कनिमोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'काला टीका' पर किए गए तंज का कड़ा जवाब दिया। पीएम मोदी ने गुरुवार को DMK सांसदों के काले कपड़े पहनने पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे बिलों पर 'काला टीका' लगा रहे हैं ताकि बुरी नजर न लगे।
कनिमोई का बयान
कनिमोई ने संसद में कहा कि काला रंग मां काली का प्रतीक है, जो शक्तिशाली देवी हैं और अहंकार, घमंड तथा अज्ञान को दूर करती हैं। उन्होंने हिंदुत्व के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह हैरान करने वाला है कि जो लोग हिंदुत्व के रक्षक होने का दावा करते हैं, उन्हें काली देवी की याद आई।
कनिमोई, सांसद, DMK:-
मुझे हैरानी है कि यहां के लोगों को, जो हिंदुत्व का रक्षक खुद मानते हैं, उन्हें काली की याद आई। उस देवी की, उस श्यामवर्णी देवी की जो काले वस्त्र धारण करती हैं। वह नारी शक्ति। वह स्त्री जो अहंकार, दंभ और अज्ञान को दूर भगाती है।
काले रंग का महत्व
कनिमोई ने आगे कहा, 'जिस रंग को हमने विरोध के लिए चुना है, वही रंग पेरियार का भी है। हमारे बौद्धिक नेता ने हमें आत्म-सम्मान सिखाया और कभी न झुकने की प्रेरणा दी। उन्होंने हमें अंत तक लड़ने की सीख दी और हम लड़ेंगे।'
महिला आरक्षण पर DMK का रुख
कनिमोई ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि एक नया बिल पेश किया जाना चाहिए और इसे कम से कम तीन महीने तक सार्वजनिक चर्चा के लिए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संविधान को एक भरोसेमंद दस्तावेज के रूप में बनाए रखना है, तो संशोधनों का मार्गदर्शन सिद्धांतों से होना चाहिए। ये सिद्धांत निष्पक्षता, संयम और ईमानदारी पर आधारित होने चाहिए।
काला टीका विवाद का संदर्भ
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री:-
अपने यहां जब भी कोई शुभ कार्य होता है, उसे नजर ना लग जाए इसके लिए काला टीका लगाया जाता है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए।
DMK के सांसद विशेष सत्र के दौरान काले कपड़े पहनकर आए थे, जो परिसीमन से जुड़े कानूनों के खिलाफ उनका विरोध था। पीएम मोदी ने कहा था कि DMK सांसद तीनों विधेयकों पर काला टीका लगा रहे हैं, जो बुरी नजर से बचाएगा। कनिमोई ने इसी पर प्रतिक्रिया दी।
DMK की चिंताएं
डीएमके का कहना है कि महिला आरक्षण के बहाने परिसीमन थोपा जा रहा है, जिससे दक्षिण भारत को सबसे अधिक नुकसान होगा। सरकार का दावा है कि परिसीमन से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी, लेकिन उनका मानना है कि इससे उनकी जनसंख्या नियंत्रण के कारण संसद में आवाज कमजोर हो जाएगी। उत्तरी राज्यों को अधिक सीटें मिलने की संभावना है।