कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव का सोने की तस्करी में बड़ा खुलासा
रान्या राव और सोने की तस्करी का मामला
नई दिल्ली। कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री रान्या राव के खिलाफ गोल्ड स्मगलिंग से जुड़े मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट में बताया गया है कि रान्या राव और उनके साथी तरुण कोंडुरु राजू पहले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी का शिकार हुए थे, जिसमें युगांडा के एक एजेंट ने उनसे लगभग 2 करोड़ रुपये ठग लिए। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ने अफ्रीका से सीधे सोना लाने की योजना बनाई थी, लेकिन युगांडा में उन्हें एक फर्जी सौदे में फंसा दिया गया। इसके बाद, उन्होंने केन्या से मदद मांगी, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब 3 मार्च 2025 को राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने रान्या राव को बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया। उनके पास से 14.213 किलोग्राम सोना बरामद हुआ, जिसकी कीमत लगभग ₹12.56 करोड़ आंकी गई। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज की और ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करते हुए ₹34 करोड़ से अधिक की संपत्ति को कुर्क कर लिया। जांच में यह भी पता चला कि ठगी के बाद इस गिरोह ने अपनी रणनीति बदल दी। अफ्रीका से सीधे सोना लाने के बजाय, उन्होंने दुबई को एक केंद्र बनाकर वहां के गोल्ड मार्केट से सोना खरीदना शुरू किया। इसके लिए 2023 में ‘वीरा डायमंड्स ट्रेडिंग LLC’ नाम की कंपनी भी स्थापित की गई।
ED का दावा है कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच इस सिंडिकेट ने 127 किलो से अधिक सोना (लगभग ₹102 करोड़) भारत में तस्करी कर लाया। यह सोना बाद में देश के जौहरियों और नेटवर्क के माध्यम से बाजार में बेचा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने तस्करी के लिए एक चालाक तरीका अपनाया। तरुण राजू अपने अमेरिकी पासपोर्ट का उपयोग करके दुबई से तीसरे देशों के लिए फर्जी एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फाइल करता था, जबकि असल में सोना दुबई एयरपोर्ट पर रान्या राव को सौंपा जाता था, जिसे वह भारत लेकर आती थीं।
इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि रान्या राव ने एयरपोर्ट पर वीआईपी प्रोटोकॉल का दुरुपयोग किया। पारिवारिक प्रभाव के चलते उन्हें कस्टम जांच से बचाने के लिए पुलिसकर्मियों की मदद ली गई। वर्तमान में, ED ने इस पूरे मामले में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। इस मामले में और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। यह केस अब केवल स्मगलिंग का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और सिस्टम के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।