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कपास के आयात में वृद्धि: सूखे के कारण घरेलू उत्पादन में कमी

भारत में सूखे के कारण कपास का घरेलू उत्पादन घटने की आशंका है, जिससे आयात में वृद्धि हो सकती है। केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की अवधि बढ़ा दी है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग को लाभ होगा। हालांकि, इससे किसानों को मिलने वाले मूल्य पर दबाव पड़ सकता है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है।
 

कपास उत्पादन में कमी का सामना

देश में सूखे के प्रभाव से कपास का घरेलू उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। इस वर्ष की मांग को देखते हुए, खपत में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। कपड़ा उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने कपास के आयात पर सीमा शुल्क में छूट की अवधि को बढ़ा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में कपास का आयात नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने ड्यूटी फ्री कपास के आयात की अवधि को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है।


कपास उत्पादन में गिरावट की आशंका

कपास के प्रमुख उत्पादक राज्यों, जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी और खेती के क्षेत्र में कमी के कारण, कपास उत्पादन में गिरावट की आशंका है। व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, 2026-27 में भारत का कपास उत्पादन 2.9 करोड़ गांठ से कम रह सकता है, जबकि घरेलू मांग 3.4 करोड़ गांठ से अधिक रहने का अनुमान है। इससे देश की विदेशी कपास पर निर्भरता बढ़ सकती है।


आयात में वृद्धि का अनुमान

विश्लेषकों का कहना है कि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में कपास का आयात 71 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) तक पहुंच गया। साल 2026-27 में कपास का आयात इसी स्तर पर या उससे अधिक हो सकता है। कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से टेक्सटाइल मिलों को उच्च गुणवत्ता वाली रूई का आयात प्रतिस्पर्धी कीमतों पर करने में सहायता मिलेगी। 2024-25 सीजन के दौरान भारत ने लगभग 41 लाख गांठ रूई का आयात किया था, जो 2025-26 में बढ़कर 71 लाख गांठ हो गया।


कपास आयात में 63% की वृद्धि

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में भारत का कपास आयात सालाना आधार पर 63% बढ़कर 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। शुल्क में छूट की अवधि बढ़ने से अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से कपास का आयात और बढ़ने की संभावना है।


कपास की कीमतों में वृद्धि

आमतौर पर अक्टूबर में नई फसल आने के बाद कपास की कीमतों में गिरावट आती है, लेकिन इस वर्ष कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। घरेलू बाजार में कपास की कीमतें 9,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चल रही हैं। 2026-27 सीजन के लिए, सरकार ने मध्यम रेशे वाली कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,267 रुपये और लंबे रेशे वाली कपास का 8,667 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।


कपास आयात पर छूट की अवधि बढ़ाई गई

सरकार ने 30 मई 2026 को कपास के आयात पर सीमा शुल्क में अस्थायी छूट की घोषणा की थी, जो 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक लागू थी। इसके तहत कपास के आयात पर 11% सीमा शुल्क से राहत दी गई थी। अब, सरकार ने इस छूट की अवधि को बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है। यह कदम टेक्सटाइल उद्योग की उत्पादन लागत को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, नई फसल के आने के दौरान ड्यूटी फ्री आयात जारी रखने का निर्णय किसानों के हितों के खिलाफ साबित हो सकता है।