कर्णवीर कौर की कहानी: सड़क दुर्घटना के बाद दो लोगों को मिली नई जिंदगी
हरियाणा की कर्णवीर कौर का दुखद अंत
कर्णवीर कौर, जो संगरूर जिले के मुलोवाल गांव की 20 वर्षीय युवती थीं, का सपना विदेश में पढ़ाई करने का अधूरा रह गया। एक सड़क दुर्घटना ने उनकी जिंदगी छीन ली, लेकिन उनके अंगों ने दो अन्य लोगों को नया जीवन दिया। उनकी दोनों किडनियां पीजीआई चंडीगढ़ में 38 और 32 वर्षीय पुरुषों में प्रत्यारोपित की गईं।
विदेश जाने की तैयारी
कर्णवीर ने 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईईएलटीएस परीक्षा पास की थी और विदेश जाने की योजना बना रही थीं। 15 अक्टूबर को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें धूरी और लुधियाना के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। 16 अक्टूबर को उन्हें पीजीआई लाया गया, जहां 21 अक्टूबर को उन्हें ब्रेन-स्टेम डेड घोषित किया गया।
पिता का साहसिक निर्णय
अपनी बेटी को खोने के बावजूद, पिता जगदीप सिंह ने अंगदान के लिए सहमति दी। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बेटी के अंगों से दूसरों को जीवन मिल सकता है, तो उनकी बेटी का जीवन सार्थक हो जाएगा।
पीजीआई के निदेशक की सराहना
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने परिवार के इस साहसिक निर्णय की सराहना की और इसे मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एचएस कोहली ने कहा कि किडनी प्रत्यारोपण गंभीर रोगियों को बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है।
अंगदान के प्रति जागरूकता की आवश्यकता
रीनल ट्रांसप्लांटेशन विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने प्रत्यारोपण में विशेषज्ञता और विभागों के समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर डॉ. नवदीप बंसल ने संवेदनशील परामर्श और परिवार के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। रोटो नॉर्थ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की।