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कर्नाटक में छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना

कर्नाटक से एक सकारात्मक खबर आई है, जहां 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया है। यह स्थिति उस समय सामने आई है जब कांग्रेस पार्टी कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने के लिए हिंदी के खिलाफ राजनीति कर रही है। हाल ही में, सिद्धरमैया सरकार ने हिंदी के प्रति अपनी नकारात्मकता को स्पष्ट किया है, जबकि केंद्र सरकार ने त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है कर्नाटक में।
 

भाषाई अस्मिता और कर्नाटक की स्थिति

भाषा के मुद्दे पर चल रही राजनीति के बीच, कर्नाटक से एक सकारात्मक खबर आई है। हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कर्नाटक के 93 प्रतिशत छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया है। यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है, खासकर उस राज्य में जहां कांग्रेस पार्टी कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने के नाम पर हिंदी के खिलाफ राजनीति कर रही है।


कुछ समय पहले, एक आंदोलन शुरू हुआ था जिसमें मांग की गई थी कि मेट्रो और बस स्टॉप पर सभी स्थानों के नाम कन्नड़ में लिखे जाएं, और जहां हिंदी में नाम हैं, उन्हें मिटा दिया जाए। सिद्धरमैया सरकार ने भी हिंदी के प्रति अपनी नकारात्मकता को स्पष्ट किया है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने स्कूलों में त्रिभाषा फॉर्मूला लागू करने का निर्णय लिया है, जिसका तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विरोध किया है, इसे हिंदी थोपने का प्रयास बताया। हालांकि, कर्नाटक में इस समय स्थिति अलग है, संभवतः चुनाव न होने के कारण भाषा का मुद्दा अभी शांत है।