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कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपए की वृद्धि, उपभोक्ताओं में नाराजगी

कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, जिससे उपभोक्ताओं में नाराजगी फैल गई है। दही की कीमत भी बढ़कर 68 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। बीएएमयूएल और राज्य सरकार ने इसे डेयरी किसानों के हित में आवश्यक कदम बताया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम किसानों और गायों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और इसके प्रभाव।
 

दूध और दही की कीमतों में वृद्धि

बेंगलुरु: कर्नाटक में रविवार से नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही दही की कीमत भी 54 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 68 रुपए प्रति किलोग्राम कर दी गई है। इस वृद्धि के बाद उपभोक्ताओं में असंतोष देखा गया, जबकि बेंगलुरु मिल्क यूनियन लिमिटेड (बीएएमयूएल) और राज्य सरकार ने इसे डेयरी किसानों के हित में आवश्यक कदम बताया है।


बीएएमयूएल के अध्यक्ष डी.के. सुरेश, जो मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के छोटे भाई हैं, ने मूल्य वृद्धि का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आजीविका को सशक्त बनाना और डेयरी क्षेत्र को स्थायी बनाना है।


उन्होंने कहा, "यदि किसान सुरक्षित रहेंगे, तो हम सभी सुरक्षित रहेंगे। नंदिनी दूध आपके लिए महंगा हो सकता है, लेकिन यह किसानों के लिए एक सकारात्मक कदम है। मैं कीमत बढ़ाने के लिए खेद व्यक्त करता हूं, लेकिन किसानों का जीवित रहना भी आवश्यक है।"


सुरेश ने यह भी कहा कि कई शहरवासी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनका संबंध पशुपालन और दूध उत्पादन से है। उन्होंने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की, जो किसानों को सशक्त बनाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से नंदिनी ब्रांड के दूध, घी और पनीर का उपयोग जारी रखने की अपील की।


राज्य सरकार का कहना है कि 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि का उद्देश्य दूध उत्पादकों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करना है। हालांकि, दही की कीमतों में 14 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि ने उपभोक्ताओं की चिंताओं को बढ़ा दिया है।


मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह कदम किसानों और गायों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है और पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा महंगा हो गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों ने दूध के दाम 12 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाने की मांग की थी, जबकि पड़ोसी राज्यों में दूध की कीमतें पहले से अधिक हैं। उन्होंने कहा, "यदि किसानों की आय पर्याप्त नहीं होगी, तो वे पशुओं के चारे पर खर्च कम करने को मजबूर होंगे, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।"


उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस निर्णय पर लंबे समय तक विचार करने के बाद ही इसे मंजूरी दी है। सूखे के कारण घटते दूध उत्पादन, किसानों की मांग और पशुधन की सुरक्षा जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।


दही की कीमतों को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सीधे तौर पर दही की कीमतों को नियंत्रित नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि दूध और उससे बने उत्पादों की कीमतों पर वसा (फैट) की मात्रा जैसे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।


कर्नाटक सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) का मानना है कि यह बढ़ोतरी डेयरी किसानों को राहत देगी, जबकि उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इससे महंगाई का अतिरिक्त बोझ आम लोगों पर पड़ेगा। इस प्रकार, दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई है।