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कर्नाटक सर्वे रिपोर्ट: बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज

कर्नाटक में हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि अधिकांश मतदाता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) पर भरोसा करते हैं। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनकी अपनी सरकार ने उन्हें गलत साबित कर दिया है। सर्वे के परिणामों के अनुसार, 84% से अधिक लोग चुनाव प्रणाली पर संतुष्ट हैं। विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाए हैं।
 

बीजेपी प्रवक्ता का बयान


नई दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कर्नाटक सरकार द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। कर्नाटक में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए किए गए इस सर्वे में यह सामने आया है कि अधिकांश मतदाता इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) पर भरोसा करते हैं और इसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का माध्यम मानते हैं।


पूनावाला ने इस सर्वे के परिणामों को साझा करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अक्सर चुनाव आयोग और EVM पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने हमेशा इन पर झूठे आरोप लगाए हैं, लेकिन अब उनकी अपनी सरकार ने उन्हें गलत साबित कर दिया है।


सर्वे रिपोर्ट के निष्कर्ष

बीजेपी नेता ने बताया कि सर्वे में यह दर्शाया गया है कि कर्नाटक के मतदाता EVM पर विश्वास करते हैं और मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 84 प्रतिशत से अधिक लोगों ने भारत की चुनाव प्रणाली पर भरोसा जताया है, जबकि 83.61% नागरिकों ने EVM पर विश्वास किया है। 2023 में किए गए पिछले सर्वे में 77.9% लोगों ने EVM पर भरोसा जताया था, जो अब बढ़कर और भी अधिक हो गया है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने भी इस सर्वे का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी ऐसे बयानों से अपनी असुरक्षा को उजागर कर रही है।


आर अशोक का बयान

आर अशोक ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि यह नाटक लोकतंत्र की चिंता से नहीं, बल्कि फैसले के डर से उत्पन्न हुआ है। कांग्रेस केवल तब संस्थानों पर सवाल उठाती है जब वह हारती है, लेकिन जीतने पर वही सिस्टम को सही मानती है। यह सिद्धांत आधारित राजनीति नहीं है, बल्कि सुविधाजनक राजनीति है। लोकसभा चुनाव के लिए किए गए सर्वे में 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों ने भाग लिया, जिनमें से अधिकांश लोग चुनाव प्रक्रिया से संतुष्ट थे।