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कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित वापसी की मांग, साधु-संतों का एकजुटता प्रदर्शन

जम्मू में साधु-संतों और धर्मगुरुओं ने कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की मांग की। साध्वी शिवानी दुर्गा ने कश्मीर के धार्मिक महत्व पर जोर देते हुए विस्थापितों को सम्मान के साथ पुनः बसाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक नेताओं ने कश्मीरी हिंदुओं के अधिकारों की बहाली और उनकी संस्कृति को संरक्षित करने की अपील की। यह एकजुटता कश्मीरी हिंदुओं के संघर्ष और उनकी पहचान को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
 

साधु-संतों की एकजुटता


नई दिल्ली: जम्मू में विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों और धार्मिक नेताओं ने कश्मीरी हिंदुओं की घाटी में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की मांग की। वक्ताओं ने जोर दिया कि कश्मीरी हिंदुओं को उनके घरों में पुनः बसाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत उपस्थित थे, जिन्होंने सामूहिक रूप से अपनी आवाज उठाई।


साध्वी शिवानी दुर्गा का दृष्टिकोण

साध्वी शिवानी दुर्गा का बयान


अंतरराष्ट्रीय महिला अघोर महामंडलेश्वर साध्वी शिवानी दुर्गा ने कश्मीर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसे शैव परंपरा से जुड़ी भूमि बताया और कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की पीड़ा को समझना आवश्यक है। उनका मानना है कि विस्थापित लोगों को सम्मान के साथ पुनः बसाने का समय आ गया है और इसके लिए समाज को एकजुट होना चाहिए।


कश्मीर और शैव परंपरा

कश्मीर और शैव परंपरा की बात


साध्वी शिवानी दुर्गा ने कहा कि कश्मीर शैव तंत्र की परंपरा से जुड़ा हुआ है और इस सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तंत्र को यहां पुनः स्थापित करना होगा ताकि भविष्य में कोई जिहादी खड़ा न हो सके और कश्मीरी हिंदू भाई-बहन अपने घरों से बेघर न हों।


उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिसमें किसी भी समुदाय को डर का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, महिलाओं को आत्मरक्षा और शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना चाहिए ताकि वे हर परिस्थिति का सामना कर सकें।


कश्मीरी हिंदुओं के संघर्ष का उल्लेख

कश्मीरी हिंदुओं के संघर्ष का जिक्र


साध्वी ने कश्मीरी हिंदुओं के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समुदाय ने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि उनके जख्मों को कुरेदने के बजाय उन्हें सहारा और सम्मान दिया जाना चाहिए। यह समाज की जिम्मेदारी है कि वह कश्मीरी हिंदुओं की पहचान और अस्तित्व को समझे और स्वीकार करे।


अधिकारों की बहाली की आवश्यकता

'अधिकार वापस मिलने चाहिए'


महाराष्ट्र से आए विश्व समानत सेना के राष्ट्रीय धर्मगुरु रामदास जगन्नाथ चौधरी ने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं को उनके खोए हुए अधिकार वापस मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से विस्थापित इस समुदाय को न्याय और सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है ताकि वे बिना भय के अपने मूल स्थान पर लौट सकें।


संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश

संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश


धर्मगुरु कोस्तव नाग ने कश्मीरी हिंदुओं से अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि रीति-रिवाज, पूजा पद्धति और सामाजिक परंपराएं किसी समुदाय की पहचान होती हैं। चाहे कश्मीरी हिंदू देश के किसी भी हिस्से में हों, उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना चाहिए।