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कांगड़ा में मॉनसून से हुई तबाही: 15 लोगों की जान गई, 270 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में इस साल मॉनसून के दौरान भारी बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई और 270 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने केंद्रीय दल को नुकसान और राहत कार्यों की जानकारी दी। प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें, पेयजल, बिजली, और कृषि शामिल हैं। जानें इस आपदा के बाद राहत कार्यों की स्थिति और सरकार की सहायता राशि में वृद्धि के बारे में।
 

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का असर


हिमाचल समाचार: इस वर्ष कांगड़ा में मॉनसून के दौरान अत्यधिक बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। इस दौरान सड़कें, पेयजल, सिंचाई, बिजली, कृषि, बागवानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भारी क्षति हुई। उपायुक्त हेमराज बैरवा ने मंगलवार को केंद्रीय दल को इस नुकसान और राहत कार्यों की जानकारी दी।


केंद्रीय दल की समीक्षा बैठक

कांगड़ा में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) ने मंगलवार को धर्मशाला में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक बैठक की। इससे पहले, दल ने आपदा प्रभावित बोह घाटी का दौरा किया। बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु ने की।


मॉडस ऑपेरेंडी में 15 लोगों की मौत

उपायुक्त ने बताया कि मॉनसून के दौरान कांगड़ा में विभिन्न घटनाओं में 15 लोगों की जान गई और 76 पशुधन का नुकसान हुआ।


पेयजल योजनाओं पर असर

नूरपुर, देहरा और पालमपुर सर्कल में लगभग 854 किलोमीटर सड़कें प्रभावित हुईं, जिससे 269.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जिले में 428 पेयजल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुईं, जिनसे 64.06 करोड़ रुपये की क्षति हुई। इनमें से 330 योजनाओं को अस्थायी रूप से बहाल किया जा चुका है।


इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान

एचटी और एलटी लाइनों तथा बिजली के खंभों के उखड़ने से राज्य विद्युत निगम को 204.57 लाख रुपये का नुकसान हुआ। फसलें खराब होने से कृषि क्षेत्र को 63.97 लाख रुपये, स्वास्थ्य क्षेत्र को 75 लाख रुपये, शिक्षा क्षेत्र को 2.57 करोड़ रुपये और बागवानी क्षेत्र को 10.73 लाख रुपये का नुकसान हुआ।


सहायता राशि में वृद्धि

उपायुक्त ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने सहायता राशि को 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया है। उन्होंने केंद्रीय दल से आर्थिक सहायता के मापदंडों में संशोधन की सिफारिश करने का आग्रह किया।