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कांग्रेस का आरोप: पीएम मोदी ने चाबहार पोर्ट से नियंत्रण छोड़ा

कांग्रेस ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने ट्रम्प के दबाव में चाबहार पोर्ट से नियंत्रण छोड़ दिया है, जिससे भारतीय जनता के 1100 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए हैं। विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि चाबहार पोर्ट से जुड़ी योजनाएं जारी हैं। अमेरिका ने भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद इस परियोजना पर काम जारी रखने के लिए छूट दी है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

कांग्रेस का गंभीर आरोप

कांग्रेस ने शुक्रवार को यह आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दबाव में ईरान के चाबहार पोर्ट से नियंत्रण छोड़ दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर कहा कि मोदी सरकार ने इस परियोजना में भारतीय जनता के 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1100 करोड़ रुपये) खर्च किए थे, जो अब बर्बाद हो चुके हैं। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।


चाबहार पोर्ट की योजनाएं जारी

जायसवाल ने कहा कि चाबहार पोर्ट से संबंधित योजनाएं अभी भी चल रही हैं और भारत अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। अमेरिका ने भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार पोर्ट से जुड़े कार्यों को जारी रखने के लिए विशेष छूट दी है, जो 26 अप्रैल 2026 को समाप्त होगी।


अमेरिका की छूट का विस्तार

अमेरिकी सरकार ने पिछले साल 29 सितंबर को चाबहार पोर्ट के लिए दी गई छूट को वापस ले लिया था, ताकि भारत ईरान पर प्रतिबंधों के बावजूद इस पोर्ट पर काम कर सके। अमेरिका ने भारत को 27 अक्टूबर 2025 तक व्यापार करने की छूट दी थी, जिसे अब 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।


अमेरिका का ईरान पर दबाव

अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंध इसलिए लगाए हैं क्योंकि वह ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है। अमेरिका का मानना है कि ईरान इन बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से मिलने वाले धन का उपयोग अपने परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल विकास के लिए करता है।


अमेरिका की अधिकतम दबाव नीति

इसलिए, अमेरिका ईरान की आय के सभी प्रमुख स्रोतों को सीमित करना चाहता है ताकि उस पर अपनी नीतियों में बदलाव लाने का दबाव बनाया जा सके। इसके अलावा, अमेरिका 2018 में ईरान के परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद से अधिकतम दबाव नीति अपना रहा है।


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