कांग्रेस की तमिलनाडु में सत्ता में हिस्सेदारी की मांग
कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति
कांग्रेस पार्टी के नेता समझ नहीं पा रहे हैं कि वे क्यों हर जगह पहले से स्थापित राजनीतिक समीकरणों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार में ऐसा करने से सभी दलों को नुकसान हुआ। अब, कांग्रेस के नेता उत्तर प्रदेश के मुद्दों पर बयानबाजी कर रहे हैं। इसी बीच, महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों में गठबंधन टूट चुका है। अब तमिलनाडु में कांग्रेस के नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि उसे सरकार में शामिल किया जाना चाहिए।
कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी की आवश्यकता है, क्योंकि उसके नेताओं का मानना है कि उनके पास अपना घोषणापत्र है और जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए सरकार में रहना जरूरी है। विधानसभा चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे से पहले ही कांग्रेस ने यह मांग उठानी शुरू कर दी है।
डीएमके और कांग्रेस के बीच विवाद
कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर ने कहा है कि डीएमके को अगले चुनाव से पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा बनेगी, तभी तालमेल की घोषणा की जाएगी। दूसरी ओर, डीएमके के नेताओं का कहना है कि यदि कांग्रेस को सरकार में शामिल करने का ऐलान किया गया, तो सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस की अन्य पार्टियां भी यही मांग करेंगी, जिससे एक खिचड़ी सरकार बनाना मुश्किल हो जाएगा।
इस बीच, कांग्रेस के नेता सरकार के कर्ज के आंकड़े पेश कर स्टालिन सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस विवाद पर विपक्षी गठबंधन की भी नजर है। अन्ना डीएमके ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि गठबंधन जीतता है, तो वह भाजपा को सरकार में शामिल नहीं करेगी, जिसका मतलब है कि सरकार केवल अन्ना डीएमके की होगी।